
उदयपुर। किसी शहर की ख़ूबसूरती शब्दों में बयान की जा सकती है, मगर जब बात उदयपुर की हो, तो उसकी आत्मा को महज़ तस्वीरों के ज़रिए ही पूरी शिद्दत से महसूस किया जा सकता है। विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर जब हम ‘झीलों की नगरी’ के वैश्विक पटल पर छाए रुतबे को देखते हैं, तो इसके पीछे उन खामोश नज़रों की तपस्या भी सामने आती है जो पिछले तीन दशक से अपने कैमरे के लेंस से इस शहर की सांस्कृतिक विरासत, सौंदर्य और अपनायत को दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट कमल कुमावत ऐसा ही एक जाना-पहचाना नाम हैं, जिन्होंने पिछले 30 वर्षों में उदयपुर के हर रंग, हर घाट, हर झरोखे और यहाँ आने वाले पर्यटकों की हर मुस्कान को इतिहास का हिस्सा बनाया है।
विदेशी चेहरों पर राजस्थानी रंग: जब सात समंदर पार के मेहमान झूम उठे
ताज़ा तस्वीर इस बात की मुकम्मल मिसाल है कि मेवाड़ की आबोहवा में ऐसा कौन सा जादू है जो किसी भी अजनबी को अपना बना लेता है। कमल कुमावत के कैमरे में कैद इस फ्रेम में विदेशी सैलानी युवतियाँ पारंपरिक राजस्थानी घाघरा-चोली और ओढ़नी ओढ़े, चेहरे पर बेपरवाह मुस्कान लिए हवा में छलांग लगाते हुए नज़र आ रही हैं।
कशीदाकारी और शीशों के काम से सजे चटख लाल, नीले और पीले परिधानों में यह खिलखिलाहट महज़ एक फ़ोटो नहीं, बल्कि ‘अतिथि देवो भव:’ की उस जीवंत परंपरा का प्रतीक है, जिसे कमल कुमावत बीते तीस सालों से देश-दुनिया तक पहुंचाकर उदयपुर के पर्यटन को नई धार दे रहे हैं।

रूपहले पर्दे की पहली पसंद : बॉलीवुड से हॉलीवुड तक उदयपुर का जलवा
कमल कुमावत के कैमरे ने सिर्फ़ सैलानियों को ही नहीं, बल्कि उदयपुर की उन हसीन लोकेशनों को भी बखूबी दिखाया है। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के निर्देशकों का उदयपुर से रिश्ता बेहद पुराना और अटूट रहा है:
सदाबहार क्लासिक्स: धर्मेंद्र और आशा पारेख की सुपरहिट फ़िल्म ‘मेरा गांव मेरा देश’ की देहाती लोकेशन और मंदिर के दृश्य हों, या फिर धर्मेंद्र, जीतेंद्र और राजेश खन्ना स्टारर ‘राजपूत’ के शाही महलों की भव्यता—उदयपुर ने हर दौर में सिल्वर स्क्रीन को भव्यता दी है।
एक्शन और ड्रामा का संगम: रेखा की दमदार अदाकारी वाली ‘फूल बने अंगारे’ के कई अहम हिस्से शहर की ऐतिहासिक इमारतों और घाटों पर फिल्माए गए।

संजीदा सिनेमा और कॉमेडी: ऋतिक रोशन और करिश्मा कपूर की संजीदा फ़िल्म ‘फ़िज़ा’ के खूबसूरत बैकड्रॉप से लेकर गोविंदा और रानी मुखर्जी की हल्की-फुल्की कॉमेडी ‘चलो इश्क लड़ाएं’ तक, उदयपुर की गलियां और झीलें हर जॉनर के निर्देशकों की पहली पसंद बनीं।
वैश्विक पटल और आधुनिक फ़िल्में: जेम्स बॉन्ड की विश्वप्रसिद्ध फ़िल्म ‘ऑक्टोपसी’ (Octopussy) ने जहां उदयपुर के लेक पैलेस को दुनिया भर में मशहूर किया, वहीं ‘ये जवानी है दीवानी’, ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ और ‘धड़क’ जैसी फिल्मों ने नई पीढ़ी के युवाओं के दिलों में उदयपुर घूमने की चाहत जगाई।

कैमरे की नज़र से पर्यटन को नई पहचान
उदयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों—चाहे वह पिछोला के किनारे गणगौर घाट की शाम हो, जगमंदिर का जलमहल हो, सहेलियों की बाड़ी के फव्वारे हों या मानसून पैलेस (सज्जनगढ़) से सूर्यास्त का नज़ारा—कमल कुमावत ने इन सभी को अनूठे एंगल्स से कैद किया है।
पर्यटन दिवस पर उनकी ये तस्वीरें इस बात का प्रमाण हैं कि पर्यटन केवल होटलों और टिकटों का कारोबार नहीं, बल्कि संस्कृतियों के मिलन का उत्सव है। तीन दशकों से अनवरत जारी उनकी यह फोटो-यात्रा उदयपुर की विरासत को सहेजने और उसे दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने में एक मजबूत सेतु का काम कर रही है।
About Author
You may also like
कुर्सी, कौम और कर्तव्य : उदयपुर में नवनिर्वाचित पार्षद योगेश कुमावत का भव्य अभिनंदन
विश्व पर्यटन दिवस पर सिटी पैलेस में सजी पैनोरमा उदयपुर सीज़न-3 कला प्रदर्शनी
पर्दे के पीछे : 272 भूखंडों का सिंडिकेट और दो करोड़ का हफ्ता
उदयपुर में 272 भूखंड घोटाले में रिश्वत का खेल : SOG के एएसपी मुकेश सोनी को एसीबी ने हिरासत में लिया, दलाल उदयपुर में दो करोड़ की रिश्वत लेते पकड़ा
रिश्वत का यह कैसा नंगा नाच! पुलिस के नाम पर दो करोड़ की दलाली और उदयपुर में सुशासन का ढोल
