
सैयद हबीब, उदयपुर।
झीलों की नगरी उदयपुर में नगर निगम चुनावों की बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है। चुनावी समर के आंकड़ों और जमीनी समीकरणों का सूक्ष्म अध्ययन करें तो इस बार मुकाबला केवल पारंपरिक द्विदलीय टकराव तक सीमित नहीं है, बल्कि बागियों और निर्दलीयों की मौजूदगी ने गणित को बेहद उलझा दिया है। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक लालकुमार चुग द्वारा 80 वार्डों के विस्तृत आंकड़ों के आधार पर किए गए चुनावी विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि निगम की सत्ता की चाबी उन 41 वार्डों से तय होगी जहां मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय बन चुका है।
वर्गवार सीटों और मतदाताओं का सामाजिक ताना-बाना
लालकुमार चुग के विश्लेषण के अनुसार, उदयपुर नगर निगम के कुल 80 वार्डों में मतदाताओं का वितरण और वर्गवार सीटों का समीकरण इस प्रकार है:
सामान्य वर्ग (General): सामान्य वर्ग के पास कुल 48 सीटें हैं, जिनमें 32 सीटें सामान्य (ओपन) और 16 सीटें सामान्य (महिला) के लिए आरक्षित हैं। मतदाताओं के लिहाज से सामान्य ओपन वार्डों में 1,56,608 मतदाता (38.25%) और सामान्य महिला वार्डों में 83,376 मतदाता (20.36%) हैं। यानी लगभग 58.6% मतदाता सामान्य वर्ग की सीटों के दायरे में आते हैं।
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): ओबीसी के खाते में कुल 16 सीटें हैं, जिनमें 11 ओबीसी ओपन और 5 ओबीसी महिला सीटें शामिल हैं। ओबीसी ओपन वार्डों में 58,890 मतदाता (14.38%) और महिला वार्डों में 25,464 मतदाता (6.21%) पंजीकृत हैं।
अनुसूचित जनजाति (ST): एसटी वर्ग के लिए कुल 8 सीटें आरक्षित हैं (5 एसटी ओपन और 3 एसटी महिला)। इनमें एसटी ओपन में 30,010 मतदाता (7.33%) और महिला वार्डों में 18,429 मतदाता (4.50%) शामिल हैं।
अनुसूचित जाति (SC): एससी वर्ग के लिए भी कुल 8 सीटें हैं (5 एससी ओपन और 3 एससी महिला)। यहां ओपन सीटों पर 24,856 मतदाता (6.00%) और महिला सीटों पर 11,772 मतदाता (2.87%) हैं।
मुकाबलों का स्वरूप: 39 पर सीधा मुकाबला, 41 वार्डों में फंसा पेंच
चुनावी आंकड़ों की गहराई में उतरते हुए विश्लेषक लालकुमार चुग बताते हैं कि 80 वार्डों में से आधे से अधिक सीटों पर परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं:
सीधा मुकाबला (39 वार्ड): केवल 39 वार्ड ऐसे हैं जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच आमने-सामने की सीधी टक्कर है। इनमें सामान्य ओपन की 16, सामान्य महिला की 9, ओबीसी ओपन की 7, ओबीसी महिला की 3, एससी ओपन की 2 और एससी महिला की 2 सीटें शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि एसटी वर्ग की किसी भी सीट पर सीधा मुकाबला नहीं है।
त्रिकोणीय मुकाबला (29 वार्ड): 29 वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय हो चुका है। इनमें सामान्य ओपन के 12, सामान्य महिला के 3, ओबीसी ओपन के 3, ओबीसी महिला का 1, एसटी ओपन के 4, एसटी महिला के 3 और एससी ओपन के 3 वार्ड शामिल हैं। यहां निर्दलीयों और बागियों ने दोनों प्रमुख दलों की नींद उड़ा रखी है।
तीन से अधिक प्रत्याशी (12 वार्ड): 12 वार्डों में बहुकोणीय घमासान है जहां तीन से अधिक मजबूत प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इसमें सामान्य ओपन के 4, सामान्य महिला के 4, ओबीसी ओपन का 1, ओबीसी महिला का 1, एसटी ओपन का 1 और एससी महिला का 1 वार्ड शामिल है।
विश्लेषण का सार: एसटी सीटों पर पूरी तरह बिखराव, बागियों के हाथ चाबी
लालकुमार चुग के अनुसार, इस पूरे आंकड़े का सबसे अहम राजनीतिक पहलू यह है कि एसटी वर्ग के सभी 8 वार्डों (5 ओपन और 3 महिला) में सीधा मुकाबला पूरी तरह गायब है; वहां 7 सीटों पर त्रिकोणीय और 1 सीट पर बहुकोणीय मुकाबला है।
कुल मिलाकर 80 में से 41 सीटों पर निर्दलीयों और बागियों का सीधा दखल है। ऐसे में जिस भी दल का बागी प्रत्याशी अधिक वोट काटेगा, नुकसान उसी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को उठाना पड़ेगा। नगर निगम में स्पष्ट बहुमत का बोर्ड बनेगा या निर्दलीयों की बैसाखियों के सहारे सत्ता की सीढ़ियां चढ़ी जाएंगी, इसका फैसला इन्हीं 41 पेचीदा वार्डों के मतदाता करेंगे।
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