
उदयपुर। जब कानून की कठोरता मानवीय संवेदनाओं का स्पर्श पा ले, तब शासन केवल व्यवस्था का पर्याय नहीं रह जाता, बल्कि समाज के विश्वास का आधार बन जाता है। राजस्थान के पुलिस महानिदेशक के निर्देशानुसार प्रदेशभर में 1 जुलाई से 29 जुलाई 2026 तक संचालित ‘महिला सुरक्षा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत शनिवार को उदयपुर पुलिस ने सुरक्षा और संवेदना का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसने खाकी के मानवीय स्वरूप को नई पहचान दी।
जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान के दो प्रमुख आयाम रहे—एक ओर कच्ची बस्तियों में श्रमशील महिलाओं से सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया, तो दूसरी ओर अकेले रह रहे बुजुर्ग नागरिकों के घर पहुंचकर उनके कुशलक्षेम की जानकारी ली गई और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया।
जब खाकी ने दी अपनों-सी दस्तक
जीवन की संध्या बेला में अकेलेपन का मौन अक्सर सबसे बड़ा बोझ बन जाता है। ऐसे समय में उदयपुर पुलिस की यह पहल केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व की जीवंत अभिव्यक्ति बनकर सामने आई।
जिले के सभी थानाधिकारियों, बीट अधिकारियों तथा महिला बीट अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिकों के घर पहुँचकर उनसे आत्मीय संवाद किया। उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं की जानकारी ली गई तथा किसी भी आपात स्थिति में पुलिस की त्वरित सहायता उपलब्ध रहने का विश्वास दिलाया गया।
स्वयं जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अकेले रह रहे बुजुर्ग दंपतियों और एकल वरिष्ठ महिलाओं से मुलाकात कर उनकी समस्याएँ सुनीं। उन्होंने कहा कि समाज के वरिष्ठ नागरिक केवल परिवारों की धरोहर ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत के संवाहक हैं। उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना पुलिस का दायित्व ही नहीं, सामाजिक कर्तव्य भी है।
श्रमशील महिलाओं से संवाद, जागरूकता का सशक्त संदेश
अभियान के दूसरे चरण में कच्ची बस्तियों और स्लम क्षेत्रों में रहने वाली एक हजार से अधिक महिला श्रमिकों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
अपने संबोधन में डॉ. अमृता दुहन ने कहा कि महिला सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा प्रतिबद्धता है। उन्होंने महिलाओं से बिना किसी भय या संकोच के अपनी समस्याएँ पुलिस तक पहुँचाने का आह्वान किया और आश्वस्त किया कि प्रत्येक शिकायतकर्ता की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सीआईडी जोन) चेतना भाटी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (महिला अपराध) अंजना सुखवाल की उपस्थिति रही। पुलिस उपाधीक्षक नीतू सिंह ने महिलाओं एवं बालिकाओं को ‘गुड टच-बैड टच’ के विषय में जागरूक किया, जबकि उप निरीक्षक राजेश्वरी ने आत्मरक्षा के व्यावहारिक उपायों का प्रशिक्षण देकर विपरीत परिस्थितियों में आत्मविश्वास के साथ स्वयं की सुरक्षा करने के गुर बताए।
सुरक्षा का आधुनिक संदेश
अभियान के दौरान उपस्थित महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों को आपातकालीन हेल्पलाइन 112, महिला सहायता हेल्पलाइन 1090, साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 तथा राजकॉप ऐप के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई।
साथ ही घरेलू सहायकों एवं किरायेदारों के पुलिस सत्यापन, साइबर अपराधों से बचाव तथा ‘कालिका बीट पेट्रोलिंग यूनिट’ एवं ‘महिला बीट अधिकारी योजना’ जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से उपलब्ध सुरक्षा तंत्र से भी अवगत कराया गया।
जनभागीदारी से सशक्त हुआ अभियान
कार्यक्रम में वन स्टॉप सेंटर की रेखा जीनगर तथा महिला सलाह एवं सुरक्षा केंद्र की काउंसलर पुष्पलता चौहान ने महिलाओं को उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी दी। वहीं हिंदुस्तान जिंक एवं वेदांता समूह के सीएसआर एवं सुरक्षा प्रकोष्ठ से जुड़े अधिकारियों—अनुपम निधि, केसी ललिता, अनिल गाड़िया, प्रकाश श्रीमाली, मांगीलाल अहीर, आदित्य नारायण ठाकुर, रुचिका चावला एवं अपर्णा व्यास ने भी अभियान में सहभागिता निभाई।
संवेदनशील पुलिसिंग का सशक्त उदाहरण
उदयपुर पुलिस का यह अभियान केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह संदेश है कि आधुनिक पुलिसिंग का वास्तविक स्वरूप केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग—विशेषकर महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों—के मन में सुरक्षा, सम्मान और विश्वास का वातावरण निर्मित करना भी है। जब खाकी संवेदना के साथ जनसरोकारों से जुड़ती है, तब कानून का स्वरूप केवल व्यवस्था का नहीं, बल्कि मानवीय संरक्षण का भी बन जाता है।
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