दौरों की गुलाबी सियासत या जमीनी सुधार? उदयपुर के ऐतिहासिक ‘गुलाब बाग’ की बदलती तस्वीर

उदयपुर। शहर की सांसों में बसने वाले ऐतिहासिक गुलाब बाग में शनिवार को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक हलचल देखने को मिली। शहर विधायक ताराचंद जैन और नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने लाव-लश्कर के साथ पूरे बाग का विस्तृत दौरा किया। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का यह दौरा बाग की विरासत को संभालने की दिशा में एक बड़ी चुनौती भी है और एक उम्मीद भी, क्योंकि यहां प्रतिदिन आने वाले हजारों नागरिकों का दिल इस ऐतिहासिक उद्यान से जुड़ता है।

दौरे के दौरान जनता की समस्याओं को सुना गया और मौके पर ही कई बड़े फैसले लिए गए, लेकिन सवाल यही है कि क्या ये फैसले सिर्फ कागजों तक सीमित रहेंगे या जमीन पर भी उतरेंगे? दौरे में विधायक के साथ अधिशासी अधिकारी अखिल अरोड़ा, बीजेपी जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह, पूर्व पार्षद एवं एडवोकेट दिनेश गुप्ता, निगम के पूर्व वाइस चेयरमैन पारस सिंघवी, अशोक गुप्ता, ओमजी खोखावत, दीपक औदिच्य, डॉ. दीपक औदिच्य आदिश मौजूद थे। इस मौके पर गुलाबबाग में पार्किंग व्यवस्था और निगम की पेड पार्किंग में मनमर्जी से वसूली का भी मुद्दा उठाया गया।

दौरों की जमीनी हकीकत और प्रमुख सुधारात्मक निर्णय

अधिकारियों ने मौके पर ही जनता से सीधा संवाद किया, जिसके बाद गुलाब बाग के कायाकल्प के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं बनाई गईं:

श्वानों के आतंक से मुक्ति की पहल : भ्रमण पर आने वाले बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बाग से कुत्तों को तुरंत अन्यत्र सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए। साथ ही आमजन से भी अपील की गई है कि वे इन्हें यहां भोजन न डालें।

सड़ते पेड़ों को हटाने के निर्देश : वर्षों से टूटकर पड़े और सड़ रहे पेड़ों की सुध लेते हुए उन्हें तुरंत हटाने की कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है, जिससे बाग की खूबसूरती वापस लौट सके।

दाना डालने का स्थान होगा तय : पार्क में चूहों के बढ़ते साम्राज्य (जो पेड़ों की जड़ों को खोखला कर रहे हैं) पर लगाम लगाने के लिए अब पक्षियों को दाना डालने का एक निश्चित स्थान (बर्ड फीडिंग जोन) तय किया जाएगा।

कमल तलाई की सफाई और फव्वारे : बदबू मारते पानी और बंद पड़े फव्वारों की शिकायत पर विधायक और आयुक्त ने खुद मौका मुआयना किया और तलाई को साफ कर फव्वारों को दोबारा चालू करने के कड़े निर्देश दिए।

समय सीमा में बढ़ोतरी : मंदिरों में होने वाली रात की आरती को ध्यान में रखते हुए बाग बंद होने का समय रात 8 बजे से बढ़ाकर 9 बजे कर दिया गया है, जो स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए एक बेहद सकारात्मक और संवेदनशील निर्णय है।

प्राचीन धरोहर और सीवरेज पर तीखा कटाक्ष

एक तरफ जहां नए समय और सुधारों की बात हो रही है, वहीं बाग की मूल आत्मा आज भी प्रशासनिक अनदेखी का शिकार है। गुलाब बाग की वह ऐतिहासिक और प्राचीन सिंचाई पद्धति, जो कभी छोटी-छोटी सुंदर नहरों के माध्यम से पूरे बाग को सींचती थी, आज पूरी तरह बंद पड़ी है। हालांकि, आयुक्त ने इसे पुनर्जीवित करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन सवाल यह है कि इसे इस बदहाली तक पहुंचने ही क्यों दिया गया?

इसके अलावा, बाग के भीतर सीवरेज का गंदा पानी आना और नए अवैध कब्जों के प्रयास होना, सुरक्षा और प्रबंधन तंत्र की पोल खोलता है। पार्क को पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त बनाने की घोषणा तो की गई है, लेकिन बिना सख्त जुर्माने के इसे लागू करना केवल एक सरकारी रस्म बनकर रह जाएगा।

सुझाव : कैसे लौटेगी गुलाब बाग की असली रंगत?

दौरे केवल फाइलों का हिस्सा न बनें, इसके लिए कुछ जरूरी कदम उठाने होंगे:

सख्त प्लास्टिक बैन: केवल समझाइश नहीं, बल्कि प्लास्टिक लाने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए।

सुरक्षा और सत्यापन: बाग परिसर के भीतर कौन-कौन रह रहा है, इसका त्वरित सत्यापन कर अवैध कब्जों को तुरंत ध्वस्त किया जाए।

नियमित मॉनिटरिंग: वीआईपी दौरों का इंतजार किए बिना, सफाई और फव्वारों की देखरेख के लिए एक स्थायी कमेटी बनाई जाए।

उदयपुर की जनता अब सिर्फ आश्वासनों के गुलाब नहीं, बल्कि धरातल पर काम देखना चाहती है ताकि यह ऐतिहासिक धरोहर अपनी पुरानी चमक वापस पा सके।

 

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