जश्न-ए-ईद मीलादुन्नबी का पुरजोश आग़ाज़ : नारों से गूंजा अंजुमन चौक, सैफ़-ए-मिल्लत ने सीरत-ए-मुस्तफ़ा पर डाली रौशनी

उदयपुर। शहर के तारीखी अंजुमन चौक में अंजुमन तालीमुल इस्लाम के ज़ेरे-एहतिमाम दो रोज़ा जश्न-ए-ईद मीलादुन्नबी का बावक़ार और पुरअसर आग़ाज़ हुआ। पीर की शब बाद नमाज़-ए-इशा कलाम-ए-पाक की तिलावत-ए-कलाम-ए-रब्बानी से जलसे की शुरुआत हुई। जलसे की निज़ामत तंज़ीमुल उलमा के सदर मौलाना ज़ुलकरनैन बल्यावी ने फ़रमाई, जबकि क़यादत ख़लीफ़ा-ए-हुज़ूर मुजाहिद-ए-मिल्लत मौलाना आस मोहम्मद मुजाहिदी व मौलाना सोबदार आलम ने की। महफ़िल का माहौल सरकार की आमद के नारों और दुरूद-ओ-सलाम के गजरों से पूरी तरह रूहानी रंग में सराबोर नज़र आया।

सीरत-ए-तैय्यबा पर अमल ही निजात का ज़रिया: सैफ़-ए-मिल्लत

अंजुमन तालीमुल इस्लाम के सदर हाजी मुख़्तार क़ुरैशी और सेक्रेट्री एडवोकेट मुस्तफ़ा शेख़ ने बताया कि जलसे में ख़ानवाद-ए-ग़ौस-ए-आज़म, ख़लीफ़ा-ए-ताजुश्शरीआ, पीर-ए-तरीक़त सैफ़-ए-मिल्लत हज़रत अल्लामा सय्यद सैफ़ रज़ा क़ादरी (बरेली शरीफ़) बतौर मुक़र्रिर-ए-ख़ुसूसी तशरीफ़ लाए।

हज़रत सैफ़-ए-मिल्लत ने अपने पुरमग्ज़ और बसीरत-अफ़रोज़ ख़िताब में फ़रमाया कि पैग़म्बर-ए-इस्लाम ﷺ की सीरत-ए-मुबारका पूरी इंसानियत के लिए हिदायत और रहमत का सरचश्मा है। उन्होंने अक़ीदतमंदों को नसीहत करते हुए कहा:

“अगर दुनिया में एक बेहतरीन और बाअमल इंसान की मिसाल क़ायम करनी है, तो हर मुसलमान को अपनी ज़िंदगी के हर मोड़ और हर क़दम पर हुज़ूर ﷺ की सीरत-ए-तैय्यबा और आपकी तालीमात को अपनाना होगा।”

नातिया कलाम से महक उठी बज़्म

भिवंडी (मुंबई) से तशरीफ़ लाए ख़ास नातख़्वां अब्दुल मुस्तफ़ा नूरी ने अपनी सोज़-ओ-गुदाज़ से भरी आवाज़ में हम्द, नात और मनक़बत का नज़राना पेश किया।

जब उन्होंने आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ां और ताजुश्शरीआ के मशहूर तराने ‘ज़िंदगी ये नहीं है किसी के लिए, ज़िंदगी है नबी की नबी के लिए’ पढ़े, तो पूरा पंडाल वज्द में आ गया।

‘सरकार की आमद मरहबा’ और ‘दिलदार की आमद मरहबा’ के गगनभेदी नारों से अंजुमन चौक गूंज उठा।

उलमा-ए-किराम और मोअज्ज़ज़ हस्तियों की शिरकत

इस नूरानी महफ़िल में शहर के मोअज्ज़ज़ उलमा-ए-किराम और सैकड़ों अक़ीदतमंदों के साथ अंजुमन तालीमुल इस्लाम के सदर मुख़्तार क़ुरैशी, सेक्रेट्री मुस्तफ़ा शेख़, नायब सदर फ़ारूक़ क़ुरैशी, जॉइंट सेक्रेट्री इज़हार हुसैन, काबीना मेंबर सय्यद इरशाद अली, एडवोकेट आदिल, फ़िरोज़ बशीर ख़ान, तनवीर चिश्ती, एडवोकेट तौक़ीर रज़ा, अनीस अब्बासी, एडवोकेट शहज़ाद ख़ान, फ़ख़रुद्दीन शेख़, इरशाद ख़ान, अनीस रज़ा, अज़हर ख़ान, इरफ़ान अशरफ़ी, अब्दुल वाहिद, आफ़ताब आलम, क़मर रज़ा, साजिद रज़ा और शाहिद शरीक रहे।

आज रात का ख़ास आकर्षण: मुफ़्ती ग़ुलाम जिलानी अज़हरी का ख़िताब

मंगलवार रात बाद नमाज़-ए-इशा अंजुमन चौक में जलसे के दूसरे मरहले की महफ़िल सजेगी। इसमें सैफ़-ए-मिल्लत सय्यद सैफ़ रज़ा क़ादरी के साथ ख़लीफ़ा-ए-ताजुश्शरीआ व मुहद्दिस-ए-कबीर मुफ़्ती ग़ुलाम जिलानी अज़हरी (खंडवा, मध्य प्रदेश) का ख़ास इल्मी व रूहानी ख़िताब होगा।

 

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