
उदयपुर। शहर की शांत रातों में लगातार हो रही चोरी की वारदातों ने लोगों की नींद उड़ा रखी थी। हर सुबह एक नई कॉलोनी में ताले टूटे मिलते, किसी के घर से जेवरात गायब होते तो किसी की मोटरसाइकिल। यह कोई सामान्य चोर नहीं थे — ये थे “गैंग ऑफ नाइट”, एक शातिर गिरोह जो रात के अंधेरे में शहर की सुरक्षा को चुनौती दे रहा था।
शुरुआत : जब चुप्पी खतरनाक लगने लगी
थाना सविना की डायरी में दर्ज हो रहे एक जैसे प्रकरणों ने पुलिस को सोचने पर मजबूर कर दिया — हर केस में तरीका लगभग एक जैसा, कोई गवाह नहीं, और चोरों का कोई सुराग नहीं। पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल ने आदेश जारी किया: “अब और नहीं।” अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश ओझा और डीएसपी छगन पुरोहित के पर्यवेक्षण में एक विशेष टीम का गठन हुआ। थानाधिकारी अजयसिंह राव को कमान सौंपी गई।
रेकी से रेपुटेशन तक : कैसे काम करता था गिरोह
चारों आरोपी — राजु, रामलाल उर्फ रोशन, हीरालाल और गंगाराम उर्फ कालु — ने मिलकर एक गैंग बना रखा था। दिन में ये इलेक्ट्रिशियन बनकर कॉलोनियों में घूमते और मकानों की रेकी करते। शाम को वे दोबारा उसी जगह लौटते, इस बार निगाह सिर्फ एक चीज़ पर — कौन सा मकान सुनसान है। फिर रात के अंधेरे में ताले टूटते, दरवाजे खुलते, और सामान गायब हो जाता।
अगर घर के भीतर कुछ ना मिला, तो बाहर खड़ी बाइक ही उनकी कमाई बनती। चोरी का सामान बिकता, पैसा बंटता और अगली चोरी की स्कीम बनती।
प्लॉट में नया किरदार: चोरी का सामान खरीदने वाला
हर अपराधी को एक मददगार चाहिए — इस गैंग को मिला पंकज उर्फ पिन्टु। वह चोरी का सामान खरीदता और उसे खपाता। उसका काम था सबूत मिटाना और चोरों को नगद देना। यही उसकी चुप्पी की कीमत थी।
गिरफ्तारी: जब शातिर गिरोह फंसा जाल में
सविना पुलिस की लगातार निगरानी, तकनीकी साक्ष्य और खुफिया सूचना के आधार पर आखिरकार जाल बिछाया गया। एक ही रात में पुलिस ने पूरे गिरोह को दबोच लिया। पूछताछ में आरोपियों ने 50 से अधिक वारदातें कबूल की हैं — और अभी सिलसिला रुका नहीं है।
गिरफ्तार आरोपियों की फाइल खोलें तो…
राजु मीणा: 6 पुराने केस, स्थाई वारंटी।
रामलाल उर्फ रोशन: 2 केस, लेकिन पकड़ से बाहर।
हीरालाल मीणा: 19 केस – चोरी, लूट, हत्या, पुलिस से भिड़ंत — हिस्ट्रीशीटर घोषित।
गंगाराम उर्फ कालु: 14 केस — एक प्रोफेशनल क्रिमिनल।
पंकज उर्फ पिन्टु: वह जो चोरी को बाज़ार में बदलता था।
एपिलॉग: शहर को सुकून, पुलिस को सलाम
उदयपुर पुलिस की यह कार्रवाई न केवल शहर के नागरिकों में विश्वास बहाल करती है, बल्कि एक कड़ा संदेश भी देती है — कोई भी अपराधी, कितना भी चालाक क्यों न हो, कानून की नजरों से बच नहीं सकता।



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