
फतहसागर पाल पर फ्लावर शो, लेकिन द्वार पर बदहाली—प्रशासन की अनदेखी पर उठे सवाल
उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में एक बार फिर फतहसागर पाल पर फ्लावर शो की तैयारियां जोरों पर हैं। हर साल की तरह इस आयोजन को देखने के लिए हजारों देशी-विदेशी पर्यटक और स्थानीय लोग यहां पहुंचते हैं। रंग-बिरंगे फूल, सजावट और झील की खूबसूरती उदयपुर की पहचान को और निखारती है।
लेकिन इसी भव्य आयोजन के बीच एक कड़वी सच्चाई भी सामने खड़ी है, जिसे प्रशासन वर्षों से नजरअंदाज करता आ रहा है।
फतहसागर पाल के मुख्य द्वार पर स्थित फतहसागर झील का ओवरफ्लो क्षेत्र आज बदहाली का प्रतीक बन चुका है। कचरा, गंदगी और अव्यवस्था ने इस स्थान को इतना बदसूरत बना दिया है कि यहां से गुजरने वाले पर्यटकों को निराशा होती है।
विडंबना यह है कि जब झील ओवरफ्लो होती है, तब यही स्थान उदयपुर की सबसे सुंदर और आकर्षक जगहों में गिना जाता है। पानी की धार, आसपास का प्राकृतिक दृश्य और झील का सौंदर्य शहर की शान बढ़ा देता है।
ओवरफ्लो के बाद क्यों भूल जाता है प्रशासन?
अफसोस की बात यह है कि ओवरफ्लो खत्म होते ही यह स्थान प्रशासन की प्राथमिकताओं से बाहर हो जाता है।
ना नियमित सफाई,
ना सौंदर्यीकरण,
ना ही इसे स्थायी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कोई योजना।
जब फ्लावर शो जैसे बड़े आयोजनों पर लाखों रुपये खर्च किए जा सकते हैं, तो इसी प्रवेश द्वार पर मौजूद ओवरफ्लो क्षेत्र को स्थायी रूप से सुंदर बनाने की सोच क्यों नहीं?
यह सवाल सीधे-सीधे प्रशासन की कार्यशैली और संवेदनहीनता पर उंगली उठाता है।
तस्वीरें बोलती हैं सच्चाई

हाल ही में चैटGPT की मदद से कुछ कल्पनात्मक तस्वीरें तैयार की गईं, जिनमें दिखाया गया है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो इस ओवरफ्लो क्षेत्र को कितना खूबसूरत बनाया जा सकता है—
फूलों की क्यारियां,
साफ-सुथरा पैदल पथ,
लाइटिंग,
और बैठने की व्यवस्था।
जरूरी नहीं कि सब कुछ वैसा ही बने, लेकिन कुछ तो किया जा सकता है। कम से कम इसे गंदगी से मुक्त कर एक सम्मानजनक सार्वजनिक स्थल तो बनाया ही जा सकता है।

पर्यटन नगरी की छवि पर दाग
उदयपुर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान रखता है। ऐसे में शहर के प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर गंदगी और अव्यवस्था पर्यटन नगरी की छवि को नुकसान पहुंचाती है।
यह केवल सौंदर्य का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी और शहर के प्रति संवेदनशीलता का सवाल है।
अब जरूरत है कि प्रशासन केवल आयोजनों तक सीमित न रहे, बल्कि स्थायी और दूरदर्शी विकास पर ध्यान दे।
फतहसागर का ओवरफ्लो क्षेत्र बदहाली नहीं, बल्कि उदयपुर की एक और पहचान बन सकता है—बस इसके लिए इच्छाशक्ति चाहिए।
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