
उदयपुर। सेवा जहां केवल एक शब्द नहीं बल्कि साक्षात ईश्वर का रूप ले लेती है, उस नारायण सेवा संस्थान के लियों का गुड़ा स्थित परिसर में गुरुवार को मानवीय संवेदनाओं का एक अनुपम दृश्य देखने को मिला। उदयपुर के जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल जब संस्थान परिसर का अवलोकन करने पहुंचे, तो वहां का माहौल देखकर उनकी आंखें भी भर आईं। इस भावुक कर देने वाले दौरे के दौरान उन्होंने जापानी और जर्मन तकनीक से निर्मित आधुनिक ‘3डी प्रिंटेड नारायण मॉड्यूल आर्टिफिशियल लिंब फिटमेंट शिविर’ का उद्घाटन किया।
शिविर में देश के कोने-कोने से अपनी टूटी हुई उम्मीदों को समेटकर आए दिव्यांगों और उनके बेबस परिजनों से कलेक्टर ने बहुत ही आत्मीयता के साथ मुलाकात की। किसी का हाथ थामकर तो किसी के सिर पर हाथ रखकर उन्होंने उनके संघर्ष को जाना और उनके जल्द स्वस्थ होने की मंगलकामना की।
“यहां सेवा नहीं, साक्षात ईश्वर कार्य कर रहे हैं”

परिसर के भीतर जब जिला कलेक्टर ने दिव्यांगों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए संचालित निःशुल्क सिलाई, कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग और हस्तशिल्प प्रशिक्षण केंद्रों का रुख किया, तो वहां का नजारा देखकर वे भाव-विभोर हो गए। खुद को आत्मनिर्भर बनाने की जंग लड़ रहे प्रशिक्षणार्थियों के हौसले और उनके चेहरों की मुस्कान ने कलेक्टर के दिल को छू लिया।
संस्थान की इस निस्वार्थ सेवा भावना को देखकर जिला कलेक्टर ने बेहद मार्मिक शब्दों में कहा : “मैंने अपने अब तक के जीवन में दिव्यांग, लाचार और निराश्रित भाई-बहनों के प्रति समर्पित इस तरह की अगाध सेवा का रूप कहीं नहीं देखा। मुझे नहीं लगता कि पूरे देश में और कहीं भी इस तरह मासूम दिव्यांगों की चिकित्सा, उनका शिक्षण, उन्हें हुनरमंद बनाना और उनके पूरे जीवन को दोबारा संवारने का पवित्र कार्य एक साथ होता हो। मानवीय संवेदना और करुणा की इस निःशुल्क यात्रा को देखकर रूह थम जाती है; यह सब देखकर तो यही अहसास होता है कि यह इंसानी बस की बात नहीं, परदे के पीछे से यह सब साक्षात ईश्वर ही करवा रहे हैं।”
लाखों जिंदगियों में उजियारा फैला चुकी है यह अनवरत सेवा
इससे पहले, परिसर पहुंचने पर संस्थान के मार्गदर्शक और पद्मश्री से अलंकृत कैलाश ‘मानव’, संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल तथा निदेशक वंदना अग्रवाल ने जिला कलेक्टर का आदरपूर्वक स्वागत किया।
संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने नम आंखों से संस्थान के उस सफर को साझा किया जो हर रोज अनगिनत चेहरों पर मुस्कान बिखेर रहा है। उन्होंने बताया कि संस्थान अब तक 4.52 लाख से अधिक लाचार दिव्यांगों की जिंदगी को अपनी निःशुल्क सर्जरी से संवार चुका है। इसके साथ ही, समाज की मुख्यधारा से कटे ढाई हजार से अधिक दिव्यांग व निर्धन जोड़ों का घर बसाया जा चुका है और हादसों में अपने हाथ-पांव गंवाकर जिंदगी से निराश हो चुके 40 हजार से अधिक भाई-बहनों को संस्थान द्वारा निःशुल्क कृत्रिम अंग (आर्टिफिशियल लिंब) देकर उन्हें दोबारा मुस्कुराना सिखाया गया है।
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