
स्थान : फतह स्कूल मैदान, उदयपुर | समय : ब्रह्म मुहूर्त की बेला
उदयपुर में सुबह का सूरज अभी पहाड़ियों के पीछे अंगड़ाई ले ही रहा था कि उदयपुर की सड़कों पर सफेद, गुलाबी और केसरिया लिबास में लिपटी आस्था की एक अंतहीन कतार उमड़ पड़ी। दृश्य ऐसा कि जैसे झीलों की नगरी में भक्ति की कोई पवित्र गंगा बह निकली हो।
जैसे ही मैं फतह स्कूल के उस 60 हजार स्क्वायर फीट के विशाल पांडाल में दाखिल हुआ, मेरी रूह कांप उठी। चारों तरफ एक ही रंग, एक ही सादगी। हज़ारों लोग, लेकिन शोर एक तिनके का भी नहीं। इसे अनुशासन कहें या भगवान महावीर के प्रति अटूट समर्पण? मंत्र जाप शुरू होने से पहले ही वहां की हवाओं में एक अजीब सी खामोशी और रूहानियत घुल चुकी थी।
धड़क उठा कलेजा, जब एक साथ गूंजा— “नमो अरिहंताणं”
फिर वह क्षण आया जब मंच से महामंत्र का आह्वान हुआ। आप कल्पना कीजिए, जब हज़ारों कंठ एक साथ, एक सुर और एक ही लय में ‘णमोकार’ पढ़ते हैं, तो वह केवल ध्वनि नहीं रह जाती, वह एक ब्रह्मांडीय ऊर्जा बन जाती है। ड्रोन से खींची गई तस्वीरों में वह मानव श्रृंखला ऐसी दिख रही थी मानो धरती पर किसी ने भक्ति का मोजेक बना दिया हो।

देखकर दिल भर आया जब छोटे-छोटे बच्चे अपनी नन्ही उंगलियों पर जाप गिन रहे थे और बुजुर्गों की आंखों से शांति के आंसू बह रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो हर कोई अपनी व्यक्तिगत चिंताओं को उस पांडाल के बाहर छोड़ आया है, और भीतर सिर्फ ‘विश्व शांति’ की एक सामूहिक तड़प है।
तस्वीरों में कैद एक रूहानी एहसास
वो तस्वीरें केवल कागज़ का टुकड़ा नहीं हैं; उनमें कैद है एक उद्यमी की विनम्रता, एक युवा का अपनी संस्कृति से जुड़ाव और एक पूरे समाज का एकजुट संकल्प। जीतो और सकल जैन समाज के इस मंच ने आज दिखा दिया कि जब भावनाएं सच्ची हों, तो 108 देश और उदयपुर का यह मैदान, सब एक ही धड़कन से धड़कते हैं।
आज का यह ‘नवकार जाप’ उदयपुर के इतिहास में केवल एक कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि आस्था के जीवंत चमत्कार के रूप में याद रखा जाएगा।
तस्वीरों में देखिए पूरा कार्यक्रम




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