
फोटो : कमल कुमावत
उदयपुर। राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि सफलता सारे मतभेदों को ढंक लेती है। कुछ ऐसा ही नजारा उदयपुर के सूरजपोल चौराहे पर देखने को मिला, जहां देश के पांच राज्यों के चुनाव परिणामों (विशेषकर बंगाल और असम) में भाजपा की ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाने के लिए स्थानीय इकाई के तमाम दिग्गज एक मंच पर नजर आए।
इस विजय उत्सव की सबसे खास बात कार्यकर्ताओं का जोश नहीं, बल्कि नेताओं की ‘बॉडी लैंग्वेज’ रही। सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ‘उदयपुर फाइल्स’ को लेकर उदयपुर से लेकर प्रदेश स्तर तक भाजपा दो धड़ों में बंटी हुई स्पष्ट दिखाई दे रही है. सूरजपोल पर आयोजित कार्यक्रम में कंधे से कंधा मिला और हाथों में हाथ भी आए, लेकिन सियासी गलियारों में यह चर्चा आम रही कि दिलों की दूरियां जस की तस बनी हुई हैं.
भाजपा शहर जिला उदयपुर द्वारा आयोजित इस विजय उत्सव में गुटबाजी के बावजूद कार्यकर्ताओं का जोश कम नहीं था। सूरजपोल चौराहे पर कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी की और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी।
नेतृत्व का संदेश : जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ ने इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री के नेतृत्व, जन-कल्याणकारी नीतियों और कार्यकर्ताओं की मेहनत को देते हुए इसे जनता के विश्वास की जीत बताया.
दिग्गजों की मौजूदगी : एक मंच, कई गुट
मीडिया प्रभारी डॉ. सीमा चंपावत द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम में जिले के लगभग सभी प्रमुख चेहरे मौजूद थे।
प्रमुख उपस्थिति : शहर विधायक ताराचंद जैन, ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा, पूर्व महापौर रजनी डांगी, प्रमोद सामर और प्रदेश विशेष आमंत्रित सदस्य अतुल चंडालिया जैसे वरिष्ठ नेता एक साथ दिखाई दिए।
पदाधिकारी : जिला उपाध्यक्ष करण सिंह शक्तावत, दिग्विजय श्रीमाली, जिला मंत्री गिरीश शर्मा, और विभिन्न मंडलों के अध्यक्षों सहित पार्षदों ने भी उपस्थिति दर्ज कराई.
उदयपुर भाजपा के लिए यह जश्न केवल जीत की खुशी नहीं, बल्कि एकजुटता दिखाने का एक ‘अनिवार्य’ अवसर भी था. जहां एक ओर राष्ट्रीय स्तर की जीत ने ऊर्जा भरने का काम किया है, वहीं ‘उदयपुर फाइल्स’ से उपजी आंतरिक दरारें भविष्य में स्थानीय संगठन के लिए चुनौती बनी रह सकती हैं.
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