
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करने के लिए संसद में एक नया विधेयक पेश करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है।
न्यायाधीशों की संख्या: इस संशोधन के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 किया जाएगा।
कार्यकुशलता: न्यायाधीशों की संख्या में इस वृद्धि का मुख्य उद्देश्य न्यायालय की कार्यप्रणाली को अधिक कुशल बनाना और नागरिकों के लिए त्वरित न्याय सुनिश्चित करना है।
वित्तीय प्रावधान: अतिरिक्त न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन व अन्य सुविधाओं पर होने वाला खर्च भारत की संचित निधि से वहन किया जाएगा।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) के अनुसार, प्रारंभ में मुख्य न्यायाधीश के अलावा केवल सात अन्य न्यायाधीशों का प्रावधान था। समय के साथ आवश्यकताओं को देखते हुए इस संख्या में कई बार बदलाव किए गए:
1956: न्यायाधीशों की संख्या 10 निर्धारित की गई।
1960 और 1977: संख्या बढ़ाकर क्रमशः 13 और 17 की गई।
1986: न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 की गई।
2008: संख्या को 25 से बढ़ाकर 30 किया गया।
2019 (अंतिम संशोधन): पिछली बार न्यायाधीशों की संख्या को 30 से बढ़ाकर 33 किया गया था।
इस नए संशोधन विधेयक, 2026 के पारित होने के बाद अब यह संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी।
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