
उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर इन दिनों आध्यात्मिक आयोजनों से लेकर साहसिक कीर्तिमानों तक विभिन्न कारणों से चर्चा में है। शहर में जहाँ एक ओर दीक्षा और सामूहिक विवाह की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और सुरक्षा से जुड़ी खबरें भी प्रमुखता से सामने आ रही हैं।
उच्च शिक्षित शीतल लेंगी जैन दीक्षा
जैन दर्शन में एम.ए. (MA) की डिग्री प्राप्त शीतल जी आगामी फरवरी माह में संयम पथ पर कदम रखने जा रही हैं। उदयपुर समाज द्वारा उनका भव्य अभिनंदन किया गया। उन्हें साध्वी संयमलता जी द्वारा दीक्षा प्रदान की जाएगी। समाज के लोगों में इस आध्यात्मिक निर्णय को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।
प्रशासन की तैयारी : ग्रामीणों को जल्द मिलेंगे पट्टे
लंबे समय से अपनी जमीनों के हक का इंतज़ार कर रहे ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर है। संघर्ष समिति और कमिश्नर के बीच हुई सकारात्मक बैठक के बाद यह तय माना जा रहा है कि 5 फरवरी तक पट्टे जारी करने की पहली सूची सामने आ जाएगी। इससे उदयपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में खुशी की लहर है।
बर्फीली चोटियों पर उदयपुर की बेटी का पराक्रम
उदयपुर की एक बेटी ने शून्य से 30 डिग्री नीचे के तापमान और 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली जानलेवा हवाओं को मात देते हुए 23,000 फीट ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने पूरे प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया है।
वन्यजीव और सुरक्षा की चिंता
ग्रामीण क्षेत्रों में लेपर्ड (तेंदुए) का मूवमेंट मोबाइल कैमरों में कैद हुआ है। पहाड़ियों पर तेंदुए के भागते हुए वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से गश्त बढ़ाने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां
सामूहिक विवाह : क्षत्रिय मेढ़ स्वर्णकार समाज द्वारा भव्य भव्या यात्रा निकाली गई। समाज के 21 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न होगा, जिसकी शुरुआत संगीत और नृत्य के साथ हर्षोल्लास से हुई है।
जादू का रोमांच : शहर में मनोरंजन का तड़का लगाने जादूगर सम्राट शाका पधार रहे हैं। 23 जनवरी से शुरू होने वाले इस शो में ‘लड़की को तीन टुकड़ों में काटने’ जैसे हैरतअंगेज करतब दिखाए जाएंगे।
यातायात नियमों की धज्जियां
सुरक्षा के मोर्चे पर एक डराने वाली तस्वीर भी सामने आई है। यहां एक 7 सीटर जीप में 30 सवारियों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जा रहा है। लोग गाड़ी की छत और बोनट पर लटककर सफर करने को मजबूर हैं। पूर्व में हुई दुर्घटनाओं के बावजूद प्रशासन की ढिलाई चिंता का विषय बनी हुई है।
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