सपनों को मिला अपनों का संबल : नारायण सेवा के प्रांगण में 50 दिव्यांग-निर्धन जोड़ों ने थामी एक-दूसरे की जीवन-डोर

जहां बैसाखियों का दर्द खुशियों के गीतों में खो गया, गणेश स्थापना और दीप प्रज्वलन

जहां बैसाखियों का दर्द खुशियों के गीतों में खो गया, गणेश स्थापना और दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुआ आत्मिक अनुग्रह का पावन महाकुंभ

उदयपुर: जीवन के कांटों भरे रास्तों पर कभी अकेले चलने को मजबूर, शारीरिक अक्षमताओं और बेबसी के आंसुओं को पीकर जीने वाले 50 दिव्यांग और निर्धन युवक-युवतियों के जीवन में शनिवार को एक नई, रोशन भोर ने दस्तक दी। मौका था लेकसिटी की पावन धरा पर ‘नारायण सेवा संस्थान’ द्वारा आयोजित 47वें अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह 2026 (प्रथम दिवस) का, जहाँ 50 निर्धन व दिव्यांग जोड़े परिणय सूत्र में बंधने के इस अति-संवेदनशील और आत्मीय सफर के साक्षी बने।

यह केवल दो शरीरों का मिलन नहीं, बल्कि दो संघर्षशील आत्माओं का एक-दूसरे के स्वाभिमान का संबल बनने का पवित्र संकल्प था।

अश्रुपूरित आँखें और श्रद्धा का दीप: हुआ भावुक शुभारंभ

समारोह की शुरुआत जब वैदिक ऋचाओं के सस्वर पाठ और शंखध्वनि के साथ हुई, तो पूरा माहौल अलौकिक हो उठा। मुख्य मंच पर जब संस्थान के सेवाभावी साधकों और देश-विदेश से पहुंचे दानदाताओं ने दीप प्रज्वलन किया, तो कई नवदंपतियों और उनके लाचार माता-पिता की आँखों से कृतज्ञता के आँसू छलक पड़े।

यह दीप केवल रुई और तेल की बाती का नहीं था, बल्कि उन बेबस माँ-बाप के दिलों में जली उम्मीद की वह लौ थी, जो वर्षों से अपनी दिव्यांग संतानों के हाथ पीले करने की चिंता में घुट रहे थे।

विघ्नहर्ता के चरणों में अर्पण: गूंजीं ‘गणपति स्तुति’ की भावुक स्वरलहरियां

मांगलिक बेला में पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से गणेश स्थापना की पावन घड़ी संपन्न हुई। इसके पश्चात जब कलाकारों ने मंच पर ‘गणपति नृत्य स्तुति’ की प्रस्तुति दी, तो पूरे प्रांगण में मौजूद हज़ारों श्रद्धालुओं की करतल ध्वनि गूंज उठी।

विघ्नहर्ता श्री गणेश के चरणों में यह वंदना इस बात की प्रार्थना थी कि इन 50 नवयुगलों के जीवन में शारीरिक दिव्यांगता कभी आड़े न आए और उनका आने वाला कल खुशहाली, स्वाभिमान और प्रेम से महक उठे।

दर्द से हमसफ़र तक का सफर: 50 जिंदगियों की नई शुरुआत

नारायण सेवा संस्थान के इस 47वें महाकुंभ के पहले दिन, 50 दिव्यांग और अत्यंत निर्धन वंचि‍त जोड़ों की सगाई, हल्दी, और मेंहदी से जुड़ी रस्में आत्मीय माहौल में संपन्न हुईं। कल जब ये 50 जोड़े 50 पवित्र वेदियों पर बैठकर एक-दूसरे का हाथ थामेंगे, तो समाज की उस सोच पर भी करारा प्रहार होगा जो दिव्यांगता को अभिशाप मानती है।

संस्थान द्वारा इन सभी जोड़ियों को गृहस्थी बसाने का हर छोटा-बड़ा संबल और आत्मनिर्भर बनने का अटूट विश्वास सौंपा जा रहा है। प्रथम दिवस की इन मर्मस्पर्शी स्मृतियों के बाद, रविवार को वैदिक रीति-रिवाज के साथ पाणिग्रहण संस्कार (सात फेरे) और भावुक विदाई समारोह संपन्न होगा।

About Author

Leave a Reply