नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ में 47वें नि:शुल्क दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह का आगाज; हल्दी-मेहंदी की रस्मों से महका लियों का गुड़ा

संघर्ष पीछे छूटा, अपनापन मिला तो उम्मीदों के पीले रंग में रंगी 51 जोड़ों की जिंदगी

उदयपुर। किसी के चेहरे पर लंबे इंतजार के बाद खिली अप्रतिम मुस्कान थी, तो किसी की आंखों में आने वाले खूबसूरत कल का नया सपना। पीले परिधानों में सजे-धजे 51 जोड़े जब पीले फूलों से सजे भव्य मंच पर एक-दूसरे के हमसफर बनकर बैठे, तो ऐसा महसूस हुआ मानो जिंदगी के कड़े संघर्ष, तंगी और अकेलेपन का लंबा दौर हमेशा के लिए पीछे छूट गया है और जीवन ने उम्मीद व खुशियों का पावन पीला रंग ओढ़ लिया है।

किसी के लिए यह दिन अपनी शारीरिक चुनौती से उबरकर स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ने का जरिया बना, तो किसी के लिए आर्थिक अभावों के बीच अपने छोटे से आशियाने के सपने का साकार रूप। सेवा, संवेदना और नए जीवन की नई उम्मीदों से भरे इसी भाव के बीच नारायण सेवा संस्थान के ‘सेवा महातीर्थ’ (लियों का गुड़ा परिसर) में शनिवार से दो दिवसीय 47वां नि:शुल्क दिव्यांग एवं निर्धन युवक-युवती सामूहिक विवाह समारोह अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और आत्मीयता के साथ शुरू हुआ।

‘घर में पधारो गजानंद जी’ की गूंज और गणपति वंदन से मंगलारंभ

दो दिवसीय इस आयोजन का शुभारंभ प्रातः शुभ मुहूर्त में मंत्रोच्चार के बीच गणपति स्थापना और भावपूर्ण वंदन नृत्य ‘घर में पधारो गजानंद जी’ की मनमोहक प्रस्तुति के साथ हुआ। मंगल आराधना के साथ ही पूरे विवाह मंडप में पावनता और खुशियों का संचार हो गया।

तत्पश्चात हल्दी और मेहंदी की पारंपरिक रस्मों ने संपूर्ण परिसर को उत्सव के रंगों में सराबोर कर दिया। प्रातः 11:15 बजे सभी 51 जोड़े पीले वस्त्रों में फूलों से सुसज्जित ‘हाड़ा सभागार’ के मुख्य मंच पर अपने निर्धारित स्थानों पर विराजमान हुए।

संस्थान के संस्थापक-चेयरमैन पद्मश्री कैलाश ‘मानव’, सहसंस्थापिका कमला देवी, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल एवं पलक अग्रवाल ने पधारे हुए विशिष्ट अतिथियों के साथ गणपति पूजन कर विवाह समारोह का विधिवत शुभारंभ किया।

अतिथियों ने लगाई हल्दी, ढोलक की थाप और विवाह गीतों पर थिरके कदम

निदेशक वंदना अग्रवाल एवं पलक अग्रवाल के निर्देशन में भामाशाहों और अतिथियों ने विवाह की पारंपरिक रस्मों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। अतिथियों ने स्वयं वर-वधुओं के हाथों पर हल्दी का उबटन लगाया और मेहंदी की रस्म निभाई।

मांगलिक वैवाहिक गीतों, ढोलक की थाप और हंसी-खुशी के आत्मीय माहौल के बीच पूरा परिसर किसी बड़े पारिवारिक उत्सव की तरह जीवंत हो उठा। अतिथियों ने भी उत्साह में आकर पारंपरिक गीतों पर नृत्य किया और नवजोड़ों को अपना स्नेह व आशीर्वाद दिया।

समारोह के दौरान संस्थान के संस्थापक कैलाश ‘मानव’, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, जगदीश आर्य एवं देवेंद्र चौबीसा ने पधारे हुए भामाशाहों व सहयोगियों का मेवाड़ी परंपरा के अनुसार पगड़ी, उपरना एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।

सांस्कृतिक संध्या में दिखे भारतीय संस्कृति और भक्ति के विविध रंग

समारोह के पहले दिन की शाम पूरी तरह से ‘सांस्कृतिक संध्या’ के नाम रही। वैवाहिक गीतों की मधुर धुनों के बीच मंच पर आयोजित प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया।

राधा-कृष्ण के निश्छल प्रेम को दर्शाती ‘रासलीला’, हनुमान जी के अनन्य समर्पण पर आधारित ‘रुद्रावतार’, मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की ओजस्वी झांकी और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों पर केंद्रित नृत्य-नाटिकाओं ने भारतीय संस्कृति के अलौकिक रंगों को साकार कर दिया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों और विवाह गीतों की गूंज से देर रात तक पूरा सेवा महातीर्थ तालियों से गूंजता रहा।

हर जोड़े के पीछे छिपी है संघर्ष, साहस और उम्मीद की कहानी

इस सामूहिक विवाह समारोह में एक-दूजे का हाथ थामने जा रहे प्रत्येक जोड़े की अपनी एक अलग मर्मस्पर्शी कहानी है। किसी ने अपनी शारीरिक चुनौती के बावजूद जिंदगी से कभी हार नहीं मानी, तो किसी ने आर्थिक बेबसी के बीच भी अपने आत्मसम्मान और सपनों को जिंदा रखा। किसी ने लंबे अकेलेपन का दौर झेला, तो किसी ने सामाजिक विषमताओं से जूझते हुए सम्मानपूर्वक जीवनसाथी की तलाश पूरी की।

इन जोड़ों के लिए यह सामूहिक आयोजन केवल एक सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि एक नए और स्वाभिमानी जीवन अध्याय की शुरुआत है। यह आयोजन यह संदेश देता है कि जिंदगी की पहचान परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उनके सामने मजबूती से खड़े रहने के हौसले से होती है। यहाँ दो लोग केवल परिणय सूत्र में नहीं बंध रहे, बल्कि एक-दूसरे के संघर्षों का सहारा बनकर सपनों की जिम्मेदारी उठाने जा रहे हैं।

रविवार को वैदिक रीति से होंगे सात फेरे, उपहारों के साथ विदा होंगी बेटियां

संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि रविवार को प्रातः 11:15 बजे सभी 51 जोड़े वैदिक मंत्रोच्चार और अग्नि को साक्षी मानकर पवित्र सात फेरे लेंगे तथा दांपत्य जीवन में प्रवेश करेंगे।

संस्थान की ओर से प्रत्येक नवविवाहित जोड़े को नए गृहस्थ जीवन की सुगम शुरुआत के लिए आवश्यक तमाम गृहस्थी सामग्री (जैसे सिलाई मशीन, बर्तन, बिस्तर, आभूषण व दैनिक आवश्यकता के सामान) उपहार स्वरूप भेंट किए जाएंगे।

‘वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी’ में अतिथियों ने देखा सेवा का अलौकिक संसार

समारोह में पधारे सभी अतिथियों ने नारायण सेवा संस्थान के नवनिर्मित भवन ‘वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी’ का भी अवलोकन किया। उन्होंने संस्थान द्वारा संचालित मुफ़्त अस्पताल, कृत्रिम अंग निर्माण शाला और पुनर्वास केंद्रों को करीब से देखा। अतिथियों ने विभिन्न वार्डों में जाकर उपचाररत बच्चों व मरीजों से संवाद कर उनके अनुभव जाने और संस्थान द्वारा निस्वार्थ भाव से किए जा रहे मानवीय कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की।

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