
उदयपुर | मेवाड़ की वीर प्रसूता धरा आज एक बार फिर जल-संरक्षण और पूर्वजों के प्रति अटूट श्रद्धा की साक्षी बनी। वैशाख मास की मंगलमयी अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर, मेवाड़ की गौरवशाली विरासत के संवाहक और पूर्व राज परिवार के प्रमुख डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के कर-कमलों द्वारा ‘अरविन्द सरोवरम्’ का भव्य सृजन किया गया।
शिकारबाड़ी के शाही परिसर में आयोजित इस गरिमामयी अनुष्ठान में वेद-मंत्रों की गूंज और मेवाड़नाथ प्रभु एकलिंगनाथ जी के आशीर्वाद के बीच इस सरोवर की आधारशिला रखी गई। प्रकाण्ड पण्डितों और विद्वानों के सान्निध्य में संपन्न हुआ यह पुण्य कार्य केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि प्रकृति और पंचतत्वों के प्रति मेवाड़ के समर्पण का प्रतीक है।
पुण्य स्मृति को समर्पित ‘श्रद्धांजलि’
यह सरोवर गोलोकवासी अरविन्द सिंह मेवाड़ की पावन स्मृति को चिरस्थायी बनाने हेतु एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अर्घ्य है। ‘अरविन्द सरोवरम्’ के माध्यम से उनकी कालजयी स्मृतियों को प्रकृति के संरक्षण से जोड़कर एक अभिनव श्रद्धानुष्ठान पूर्ण किया गया है।
महाराणाओं की जल-विरासत का पुनर्जागरण
इतिहास गवाह है कि मेवाड़ के महाराणाओं ने सदैव जल को ‘जगदीश’ मानकर उसकी सेवा की है। कूप, कुण्ड, बावड़ियों और विशाल सरोवरों का निर्माण यहाँ की जीवन-पद्धति रही है। इसी ऐतिहासिक कड़ी को आगे बढ़ाते हुए श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने विश्व के सम्मुख जल-संचय का एक नया आदर्श प्रस्तुत किया है।
“यह केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश है कि प्रकृति का संवर्धन ही हमारा परम धर्म है।”
मुख्य आकर्षण : पावन अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त। जल-संरक्षण और भविष्य के लिए जल-संचय। मेवाड़ की पारंपरिक जल-स्थापत्य प्रणाली का आधुनिक स्वरूप।
मेवाड़ की यह अनूठी पहल आज पूरे विश्व को जल-संवर्धन और सांस्कृतिक मूल्यों को साथ लेकर चलने की प्रेरणा दे रही है।
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