उदयपुर | कुछ व्यक्तित्व केवल जन्मदिवस नहीं मनाते, वे उस दिन हजारों जिंदगियों में उम्मीद का दीप जलाते हैं। पद्मश्री से सम्मानित, नारायण सेवा संस्थान के संस्थापक कैलाश मानव का 78वां जन्मदिवस भी ऐसा ही एक दिन बना—jahan उत्सव का अर्थ केक नहीं, बल्कि करुणा थी, खुशी का स्वर संगीत नहीं, बल्कि पीड़ित मानवता की दुआएं थीं।माली कॉलोनी स्थित वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी परिसर उस दिन केवल एक आयोजन स्थल नहीं रहा, बल्कि मानवता का मंदिर बन गया। सादगी से सजा यह जन्मदिवस सेवा, संवेदना और संकल्प के उन भावों से ओतप्रोत था, जिनकी खुशबू ने हर मौजूद मन को भीतर तक भिगो दिया। केक काटने के साथ-साथ दिव्यांगों और जरूरतमंद गरीबों को फल, कंबल और स्नेहभरा भोजन कराया गया—मानो जन्म नहीं, बल्कि जीवन का उत्सव मनाया जा रहा हो।
भावनाओं से भरे अपने उद्बोधन में कैलाश मानव ने कहा कि नारायण सेवा संस्थान आज देशभर में पीड़ित मानवता के लिए आशा की किरण बनकर कार्य कर रहा है। उन्होंने विनम्रता के साथ कहा कि यह सब किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लाखों सेवा-प्रेमियों के विश्वास, सहयोग और आशीर्वाद का परिणाम है।उनके शब्दों ने उपस्थित जनसमूह को भीतर तक छू लिया—“यदि प्रतिदिन किसी गरीब या दिव्यांग के चेहरे पर मुस्कान आ जाए, तो वही मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उसी में मेरा जन्मदिवस, मेरी पूजा और मेरी सफलता निहित है।”इन पंक्तियों के साथ ही पूरे वातावरण में मौन छा गया—एक ऐसा मौन, जिसमें श्रद्धा बोल रही थी।
संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने भावुक स्वर में कहा कि हर लाभार्थी दिव्यांग की दुआ नारायण सेवा संस्थान के लिए ईश्वर का आशीर्वाद है। उन्हीं दुआओं के सहारे संस्थान को प्रतिदिन नई ऊर्जा और संबल मिलता है। उन्होंने कहा कि गुरुजी कैलाश मानव केवल संस्थान के संस्थापक नहीं, बल्कि सेवा की जीवंत प्रेरणा, करुणा की मिसाल और मानवता की चलती-फिरती पाठशाला हैं।देश के कोने-कोने से सैकड़ों सेवा-प्रेमियों ने ऑडियो और वीडियो संदेश भेजकर अपने भाव, श्रद्धा और शुभकामनाएं प्रकट कीं। दिनभर शुभेच्छाओं का ऐसा सैलाब उमड़ा, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि सेवा की भाषा न सीमाएं जानती है, न दूरी।इस भावपूर्ण अवसर पर कमलादेवी, वंदना अग्रवाल, महर्षि अग्रवाल, सुरेंद्र सलूजा, जगदीश आर्य, पलक अग्रवाल, देवेंद्र चौबीसा सहित सैकड़ों सेवाभावी कार्यकर्ता उपस्थित रहे। यह आयोजन केवल एक जन्मदिवस नहीं, बल्कि समाज के लिए सेवा, समर्पण और वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी की भावना का जीवंत संदेश बन गया—एक ऐसा संदेश, जो दिल से निकला और दिलों तक पहुंच गया।
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