कमर पर हाथ, चेहरे पर बेफिक्री: जब खाकी के रसूख के आगे घुटने टेकने लगे व्यवस्था!

उदयपुर। यह उस व्यवस्था का आईना है जिसे हम और आप ‘लोकतंत्र का कानून’ कहते हैं! उदयपुर की अदालत की दहलीज पर शनिवार को जो तस्वीर खींची गई, उसे सिर्फ एक खबर मत मानिए। वह दरअसल इस देश के उस रसूखदार तंत्र का चेहरा है, जो जेल जाते वक्त भी जनता और कानून की तरफ देखकर मुस्कुराता है।

तस्वीर में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के एडिशनल एसपी मुकेश सोनी को देखिए। वही सोनी, जिन पर 272 प्लॉटों के एक बड़े घोटाले में राहत की रेवड़ियां बांटने के नाम पर पूरे दो करोड़ रुपये की घूसखोरी का संगीन आरोप है। शनिवार को जब उन्हें कोर्ट में पेश किया जा रहा था, तो चाल-ढाल देखिए—कमर पर दोनों हाथ रखे, चेहरे पर शिकन का एक कतरा तक नहीं। न कोई पछतावा, न गुनाह का खौफ, न वर्दी की साख टूटने का दर्द। उनकी इस देह-भाषा (body language) को ध्यान से पढ़िए, वे खुलेआम यह संदेश दे रहे हैं कि “मैं आश्वस्त हूं, मेरा कुछ नहीं बिगड़ने वाला!”

और बिगड़ेगा भी कैसे?

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की अदालती लाचारी देखिए। सात दिनों तक अपने ही महकमे के इस ‘खास’ साहब को रिमांड पर रखने के बाद भी जांच एजेंसी के पास अदालत को दिखाने के लिए कोई ठोस बरामदगी नहीं थी! कोर्ट रूम में जज सतीशचंद्र गोदारा ने जब पत्रावली के पन्ने पलटे, तो हकीकत सामने आ गई। कोर्ट ने भी दो-टूक कह दिया कि सात दिन में जब कुछ बरामद नहीं हुआ, तो अब और रिमांड देना न्यायोचित नहीं है। जज साहब ने रिमांड की अर्जी खारिज करते हुए साहब और उनके दलाल सज्जन जैन को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

यह इस देश की विडंबना है कि एक अदना सा जेबकतरा पकड़ा जाए, तो पुलिस उसकी हड्डियां तोड़ देती है, मीडिया के सामने चेहरा झुकाए पेश करती है। मगर जब दो करोड़ की घूस का सौदा करने वाले अफसर के गिरेबान पर हाथ पड़ता है, तो जांच एजेंसियों की धार कुंद पड़ जाती है। सात दिन का वक्त मिलने के बावजूद डीवीआर, रिकॉर्ड्स और सीसीटीवी फुटेज की जांच अधूरी रह जाती है। नतीजा क्या? जैसे ही आरोपी जेल पहुंचे, अब उनके वकीलों के लिए जमानत का रेड कारपेट बिछ गया। ऊपर से मामले की एक अहम कड़ी, रीडर जसवंत सिंह राव अब भी हवा में गायब है!

जब रक्षक ही भक्षक की मुद्रा में आकर कमर पर हाथ धर ले, तो समझिए कि खाकी की रीढ़ कितनी खोखली हो चुकी है। सोनी साहब की यह बेफिक्री असल में उस आम आदमी के मुंह पर करारा तमाचा है, जो थाने की सीढ़ियों पर एक अदद एफआईआर के लिए महीनों एड़ियां घिसता है। यह तस्वीर चीख-चीख कर कह रही है कि अगर आपके पास रुतबा है, पहुंच है और अफसरों की जमात में रिश्ते हैं, तो फिर कानून आपके लिए महज़ एक औपचारिकता है!

 

About Author

Leave a Reply