
सीजे संजय के. अग्रवाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं कीं खारिज
जयपुर। उदयपुर के बहुचर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड (जून 2022) के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आपराधिक न्यायशास्त्र (Criminal Jurisprudence) और आतंकवाद विरोधी कानूनों के कड़े सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए एक नज़ीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में लिप्त पांच आरोपियों—वसीम अली, मुस्लिम खान, मोहसिन खान, मोहम्मद मोहसिन और आसिफ हुसैन की नियमित जमानत याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल की अगुवाई वाली खंडपीठ ने न्यायिक टिप्पणी में स्पष्ट किया कि आरोपियों द्वारा किया गया कृत्य कोई साधारण आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह आमजन में आतंक और खौफ पैदा करने के सुनियोजित इरादे से अंजाम दिया गया एक ‘आतंकी कृत्य’ (Terrorist Act) है।
न्यायिक दृष्टिकोण: व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाम समाज और राज्य की संप्रभुता
अदालत ने अपने आदेश में आपराधिक कृत्य की गंभीरता (Gravity of Offence) और उसके व्यापक सामाजिक प्रभाव का गहरा विश्लेषण किया:
राज्य की नींव पर प्रहार: अदालत ने रेखांकित किया कि दिन-दहाड़े किसी व्यक्ति की दुकान में घुसकर नृशंस हत्या करना और सांप्रदायिक विद्वेष व दहशत फैलाने के उद्देश्य से उसका वीडियो रिकॉर्ड कर प्रसारित करना सीधे तौर पर कानून के शासन और ‘राज्य की नींव’ पर प्रहार करता है।
संगठित साजिश का प्रभाव: पीठ ने माना कि ऐसी संगठित आतंकी गतिविधियों और आपराधिक षड्यंत्र का असर केवल पीड़ित परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह समाज के ताने-बाने को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचाता है।
जमानत के लिए मात्र लंबी हिरासत पर्याप्त नहीं: बचाव पक्ष द्वारा दी गई लंबी न्यायिक हिरासत (Incarceration Period) की दलील को खारिज करते हुए कोर्ट ने व्यवस्था दी कि मामले की असाधारण परिस्थितियों और जारी ट्रायल की प्रगति को देखते हुए सिर्फ हिरासत की अवधि के आधार पर अभियुक्तों को इस स्तर पर रियायत नहीं दी जा सकती।
अभियोजन (NIA) की कानूनी दलीलें और साक्ष्य
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से सीनियर एडवोकेट व एएसजी राजा ठाकरे तथा विशेष लोक अभियोजक स्नेह दीप ख्यालिया ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए ठोस कानूनी व तकनीकी साक्ष्य प्रस्तुत किए:
ट्रायल में देरी का तर्क ध्वस्त: एनआईए ने स्पष्ट किया कि केस का ट्रायल रोजाना आधार पर (Day-to-day Trial) आगे बढ़ रहा है। न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने के लिए अभियोजन के गवाहों की सूची 180 से घटाकर 89 कर दी गई है और करीब 30 अहम गवाहों के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं।
आपराधिक षड्यंत्र में सक्रिय भागीदारी: जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि ये अभियुक्त केवल मूकदर्शक नहीं थे, बल्कि उन्होंने कन्हैयालाल की रेकी करने, उसकी तस्वीरें मुख्य आरोपियों तक पहुंचाने और हत्या के पूर्व-नियोजित षड्यंत्र को जमीन पर उतारने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
फोरेंसिक व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य: अभियोजन ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), वीडियो रिकॉर्डिंग और अपराध में प्रयुक्त हथियारों की बरामदगी जैसे अकाट्य साक्ष्यों का हवाला देकर यह साबित किया कि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) आरोपियों के खिलाफ आतंकी साजिश का पुख्ता मामला बनता है।
About Author
You may also like
कमर पर हाथ, चेहरे पर बेफिक्री: जब खाकी के रसूख के आगे घुटने टेकने लगे व्यवस्था!
बड़े अस्पताल में इमरजेंसी के बेजान दरवाजे और इंसानियत की धड़कन : परदे के पीछे का दर्द
झीलों के शहर में प्यास की नौटंकी और सड़े हुए पाइप
जयपुर में राडो की ढाई करोड़ की सनसनीखेज डकैती!
उदयपुर रिश्वतकांड में एएसपी की जासूसी और आईफोन के राज
