
जयपुर/राजसमंद। व्यवस्था के गलियारों में भ्रष्टाचार अब कोई छिपी हुई बीमारी नहीं, बल्कि एक ऐसा लाइलाज कैंसर बन चुका है जो फाइल के हर पन्ने से रिस रहा है। अभी उदयपुर की आबोहवा से उस सनसनीखेज वाकये की धूल भी नहीं छंट पाई थी, जहां दो दिन पहले ही दो करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत लेते हुए एक दलाल को बेनकाब किया गया था। वह जख्म अभी ताजा ही था कि ठीक उसके पड़ोस में, राजसमंद की सरज़मीन से एक और गंदा सच सामने आ गया।
केंद्रीय माल एवं सेवाकर (GST) आयुक्तालय के एक अधीक्षक महोदय के नाम पर दलालों के दो मोहरे—अनिल पारीक और सुशील पारीक—पच्चीस लाख रुपये की गड्डियां थामे रंगे हाथ दबोचे गए हैं। सवाल यह नहीं है कि भ्रष्टाचार का यह खेल पकड़ा गया, सवाल यह है कि यह खेल आखिर कब तक बेखौफ चलता रहेगा?
सिस्टम के भीतर रची गई सांठगांठ की इबारत
जरा इस पूरी प्रक्रिया की गहराई में जाइए। एक अदद परिवादी, जिसकी दो रजिस्टर्ड फर्में हैं—उन्हें जिंदा रखने, उनकी रिकवरी रोकने, नोटिसों के मकड़जाल से मुक्ति दिलाने के एवज में साठ लाख रुपये की खुली बोली लगाई जाती है। यह कोई साधारण उगाही नहीं है, यह उस तंत्र की क्रूरता है जो कागजों के फेर में आम आदमी की सांसें घोंट देता है। पच्चीस लाख रुपये तो महज एक ‘टोकन मनी’ या पहली किश्त थी। सोचिए, उस व्यवस्था का चरित्र क्या होगा जहां न्याय और कानून के रखवाले ही दलालों की फौज खड़ी कर टैक्स चोरों और ईमानदार कारोबारियों के बीच सौदेबाजी की मंडी सजाए बैठे हों।
उदयपुर से राजसमंद तक फैली इस बीमारी के मायने
दो दिन पहले उदयपुर में करोड़ों का पकड़ा जाना और अब राजसमंद में पच्चीस लाख का यह ताजा मामला, इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि राजस्थान के इन इलाकों में ‘कर अपवंचना’ और ‘भ्रष्टाचार’ अब समानांतर सरकार चला रहे हैं। एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) ने अपने जाले बिछाए, दलालों को पकड़ा, मुख्य अधीक्षक को डिटेन किया और उनके महलोंनुमा घरों की तलाशी का सिलसिला शुरू हो चुका है—यह सब खबरें कागजी और तकनीकी रूप से मुतमईन करने वाली लग सकती हैं। लेकिन क्या यह इस व्यवस्था के सड़े हुए गलियारों को साफ करने के लिए काफी है?
जब तक इस लूट के सरगनाओं के वैचारिक और प्रशासनिक संरक्षकों तक कानून के हाथ नहीं पहुंचेंगे, तब तक इस तरह के ऑपरेशन महज एक औपचारिकता बनकर रह जाएंगे। आज जरूरत इस बात की है कि इस बीमारी के लक्षणों पर नहीं, बल्कि उसकी जड़ों पर प्रहार किया जाए, वरना उदयपुर और राजसमंद की यह फेहरिस्त कल किसी और शहर के दरवाजे पर दस्तक देती हुई नजर आएगी।
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