
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने संस्कृत के एक प्रेरणादायक सुभाषित को साझा करते हुए उद्यमियों और परिश्रमी लोगों के आत्मविश्वास व संकल्प शक्ति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग निरंतर परिश्रम और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ते हैं, उनके लिए कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।
प्रधानमंत्री ने 29 दिसंबर 2025 को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर यह सुभाषित साझा किया—
“नात्युच्चशिखरो मेरुर्नातिनीचं रसातलम्।
व्यवसायद्वितीयानां नात्यपारो महोदधिः॥”
इस सुभाषित का आशय है कि न तो कोई पर्वत इतना ऊँचा है और न ही कोई स्थान इतना गहरा, जहाँ पहुँचा न जा सके। उसी प्रकार, कोई भी महासागर इतना विशाल नहीं है जिसे पार न किया जा सके। वास्तव में, उद्यमशील और कर्मठ व्यक्तियों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के माध्यम से युवाओं, उद्यमियों और समाज के प्रत्येक कर्मठ व्यक्ति को आत्मविश्वास, परिश्रम और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
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