कोलकाता। आई-पैक के दफ़्तर और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर ईडी की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी की मौजूदगी ने इस पूरे मामले को सिर्फ़ एक जांच कार्रवाई से आगे बढ़ाकर राजनीतिक टकराव का रूप दे दिया है। ममता बनर्जी का यह कहना कि वह वहां मुख्यमंत्री नहीं बल्कि टीएमसी अध्यक्ष के रूप में गई थीं, अपने आप में एक सोची-समझी राजनीतिक और संवैधानिक दलील है। इसके ज़रिये वह यह संदेश देना चाहती हैं कि उन्होंने राज्य की प्रशासनिक शक्ति का दुरुपयोग नहीं किया, बल्कि एक राजनीतिक नेता के रूप में हस्तक्षेप किया।
ममता बनर्जी का सबसे गंभीर आरोप यह है कि ईडी की छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज़ चोरी हो गए। यह आरोप सीधे तौर पर केंद्रीय एजेंसियों की कार्यप्रणाली और नीयत पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, बिना ठोस सबूत के ऐसे आरोप कानूनी रूप से कमज़ोर माने जा सकते हैं, लेकिन राजनीतिक तौर पर यह टीएमसी के लिए एक मज़बूत हथियार साबित हो सकता है, खासकर तब जब पार्टी पहले से ही यह दावा करती रही है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को डराने के लिए किया जा रहा है।
ईडी और सीआरपीएफ के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ़ शिकायत दर्ज कराना इस मामले को और अधिक संवैधानिक और कानूनी बहस की दिशा में ले जाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि ममता बनर्जी इस लड़ाई को केवल सड़कों तक सीमित नहीं रखना चाहतीं, बल्कि पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से भी केंद्र सरकार पर दबाव बनाना चाहती हैं।
जादवपुर विश्वविद्यालय से हाजरा मोड़ तक निकाला गया मार्च भी प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालयों और छात्रों से जुड़े इलाकों से आंदोलन शुरू करना यह दिखाता है कि ममता बनर्जी खुद को लोकतंत्र, मताधिकार और संघीय ढांचे की रक्षक के रूप में पेश कर रही हैं। “दो करोड़ लोगों से मताधिकार छीनने की कोशिश” वाला बयान सीधे तौर पर केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमज़ोर करने का आरोप है, जो आने वाले चुनावी माहौल में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
कुल मिलाकर, यह मामला केवल आई-पैक या ईडी की छापेमारी तक सीमित नहीं है। यह केंद्र बनाम राज्य, संवैधानिक अधिकार, और राजनीतिक एजेंसियों के दुरुपयोग की बहस को एक बार फिर तेज़ करता है। ममता बनर्जी इसे जनता के बीच एक राजनीतिक संघर्ष के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं, ताकि सहानुभूति और समर्थन को अपने पक्ष में मोड़ा जा सके।
Keywords: Enforcement Directorate, I-PAC, Mamata Banerjee, Trinamool Congress, Federalism, Central Agencies, Political Confrontation, Democracy, Voting Rights
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