बोगनवेलिया: सिर्फ सजावट ही नहीं, सेहत का भी रक्षक; जड़ से तने तक छिपा है औषधीय गुणों का खजाना

नई दिल्ली/पटना। घरों की दीवारों और सड़कों के किनारे दिखने वाले चटकीले नारंगी, सफेद और गुलाबी बोगनवेलिया के फूल अब सिर्फ सुंदरता का प्रतीक नहीं रहे। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा के अनुसार, यह पौधा औषधीय गुणों का अनमोल खजाना है। बिहार सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग ने हाल ही में इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया है कि बोगनवेलिया का फूल, पत्तियां, तना और यहां तक कि जड़ भी कई गंभीर शारीरिक समस्याओं के समाधान में कारगर साबित होती है।

पारंपरिक चिकित्सा में बहुपयोगी है यह पौधा निक्टैजिनेसी परिवार से ताल्लुक रखने वाला बोगनवेलिया प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाले) गुणों से भरपूर होता है। जानकारों के अनुसार, इसके फूलों का काढ़ा या हर्बल चाय सर्दी-जुकाम, पुरानी खांसी और गले की खराश में रामबाण की तरह काम करती है। यह न केवल संक्रमण को कम करता है बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।

पाचन और डायबिटीज में भी सहायक बोगनवेलिया के अन्य हिस्सों के लाभ भी चौंकाने वाले हैं:

  • पाचन तंत्र: पत्तियों का रस पाचन क्रिया को दुरुस्त करने, पुरानी कब्ज और पेट दर्द जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक माना जाता है।

  • ब्लड शुगर नियंत्रण: इसके तने और छाल में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो रक्त में शर्करा (ब्लड शुगर) के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

  • त्वचा रोग और बुखार: आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार, इसके अर्क का उपयोग त्वचा संबंधी विकारों और बुखार को कम करने के लिए भी किया जाता रहा है।

कम पानी और कम देखभाल में बेहतर स्वास्थ्य इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बेहद कम पानी और न्यूनतम देखभाल में भी तेजी से पनपता है। तेज धूप और सूखे के बावजूद यह खिला रहता है, जिससे यह पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए एक आदर्श विकल्प बन जाता है। अब तक इसे केवल बाग-बगीचों की शोभा बढ़ाने वाला माना जाता था, लेकिन इसके औषधीय लाभों के सामने आने के बाद इसे ‘प्राकृतिक डिस्पेंसरी’ के रूप में देखा जा रहा है।

(Visited 22 times, 1 visits today)

About Author

Leave a Reply