तेहरान पर भीषण बमबारी में 12 की मौत, इजरायल पर ईरानी मिसाइलों की बौछार
तेहरान/वाशिंगटन/बगदाद: मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष ने आज उस समय एक नया और घातक मोड़ ले लिया जब अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सेनाओं ने ईरान की राजधानी तेहरान को निशाना बनाया। इस हमले के जवाब में ईरान ने भी इजरायल के रिहाइशी इलाकों पर मिसाइलों की बरसात कर दी है। दुनिया भर के बाजारों में ईंधन की किल्लत का डर गहरा गया है।
तेहरान में तबाही और मानवीय क्षति
आज तड़के दक्षिण तेहरान के इलाकों में हुए एक बड़े हवाई हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और 28 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। अल-जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब लोग सो रहे थे। मलबे से शवों को निकालने का काम जारी है और हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
इजरायल पर पलटवार: ‘आयरन डोम’ सक्रिय
ईरान ने तेहरान पर हुए हमले का बदला लेने के लिए इजरायल के तटीय शहर नेतन्या और मध्य इजरायल की ओर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। आसमान में रॉकेटों के निशान और धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इजरायली रक्षा सूत्रों के अनुसार, अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जिससे किसी बड़े जानी नुकसान की खबर नहीं है।
ट्रम्प का ‘शांति’ का दावा बनाम ईरान का ‘फेक न्यूज’ पलटवार
राजनीतिक मोर्चे पर भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है:
-
ट्रम्प का बयान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के साथ पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि “यह युद्ध जीता जा चुका है” और ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत है।
-
ईरान का रुख: ईरान सरकार ने ट्रम्प के इन दावों को पूरी तरह से “फेक न्यूज” करार दिया है। तेहरान का कहना है कि जब तक हमले बंद नहीं होते, किसी भी तरह की बातचीत का सवाल ही पैदा नहीं होता।
इराक: युद्ध के दो पाटों के बीच पिसा देश
इराक इस समय सबसे नाजुक स्थिति में है। बगदाद से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, इराक में अब तक 50 लोग इस क्रॉसफायर में मारे जा चुके हैं। इराक की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर है (उसका तेल राजस्व न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व में है), लेकिन जमीनी तौर पर वहां ईरानी प्रभाव वाली मिलिशिया सक्रिय हैं। इराक सरकार ने दोनों देशों से अपील की है कि वे उसकी धरती का इस्तेमाल अपनी जंग के लिए न करें।
वैश्विक ऊर्जा संकट: अप्रैल में ‘ब्लैकआउट’ की चेतावनी
युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला है:
-
शेल (Shell) की चेतावनी: शेल के सीईओ वाएल सावन ने कहा है कि यदि युद्ध जल्द नहीं थमा, तो अप्रैल 2026 तक यूरोप और एशिया में ईंधन की भारी किल्लत हो जाएगी।
-
सप्लाई चेन: दक्षिण और पूर्वोत्तर एशिया के देश पहले ही इस संकट की चपेट में आने लगे हैं।
-
कनाडा का मौका: कनाडा के ऊर्जा मंत्री ने इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा है कि दुनिया अब तेल के लिए खाड़ी देशों के बजाय कनाडा जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर देख रही है।
सऊदी अरब में ड्रोन हमले
इसी बीच, सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि उन्होंने अपने पूर्वी क्षेत्र में 11 ड्रोन और एक बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराया है। यह इस बात का संकेत है कि युद्ध की लपटें अब पड़ोसी खाड़ी देशों तक भी पहुँच रही हैं, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का केंद्र हैं।
About Author
You may also like
-
बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति मेंबर डॉ. चन्द्रगुप्त सिंह चौहान ने उठाई किसानों की आवाज, उदयपुर में बिजली कटौती रोकने की मांग
-
जल संरक्षण से ही प्रकृति का संरक्षण संभव : प्रो. पी.आर. व्यास
-
मेवाड़ नारी गौरव सम्मान से सम्मानित हुईं डॉ. अल्पना बोहरा, सामाजिक सेवा में उत्कृष्ट योगदान को मिली पहचान
-
जंग-ए-मैदान से कैसे बदल रही दुनिया…जानिए पूरी कहानी
-
नाथद्वारा रोड : वैष्णोदेवी मंदिर में 9 माताओं की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण, 12D फिल्म और शाही भंडारा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण
