मध्य-पूर्व में महायुद्ध की आहट और बदलता वैश्विक समीकरण
मुख्य केंद्र: तेहरान, तेल अवीव, वाशिंगटन और बगदाद
मध्य-पूर्व (Middle East) इस समय इतिहास के सबसे भीषण दौर से गुजर रहा है। ईरान और इजरायल-अमेरिका गठबंधन के बीच छिड़ा यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय विवाद न रहकर एक वैश्विक संकट का रूप ले चुका है। पिछले 24 घंटों के घटनाक्रम इस ओर इशारा कर रहे हैं कि कूटनीति और युद्ध के मैदान में एक साथ शह-मात का खेल चल रहा है।
1. तेहरान पर सीधा हमला और मानवीय त्रासदी
कल रात दक्षिण तेहरान में हुए हवाई हमलों ने युद्ध की विभीषणता को बढ़ा दिया है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त रेड में 12 नागरिकों की मौत और 28 के घायल होने की पुष्टि हुई है। ईरान की राजधानी के रिहाइशी इलाकों के करीब हो रहे ये हमले दिखाते हैं कि गठबंधन सेना अब ईरान के “हृदय स्थल” को निशाना बना रही है। इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल के तटीय शहर नेतन्या और मध्य इजरायल पर मिसाइलों की बौछार की है, जिससे पूरे क्षेत्र में ‘एयर रेड सायरन’ गूंज रहे हैं।
2. डोनाल्ड ट्रम्प का ‘डिप्लोमैटिक सस्पेंस’ बनाम ईरान का इनकार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दावा है कि पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है और “युद्ध जीता जा चुका है।” उनके अनुसार, ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो गया है।
विरोधाभास: जहाँ ट्रम्प इसे अपनी कूटनीतिक जीत बता रहे हैं, वहीं ईरान ने इसे ‘फेक न्यूज’ करार दिया है।
रणनीति: विश्लेषणकों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन “मनोवैज्ञानिक युद्ध” (Psychological Warfare) का सहारा ले रहा है ताकि ईरानी नेतृत्व पर दबाव बनाया जा सके और वैश्विक तेल बाजारों को शांत रखा जा सके।
3. इराक: दो पाटों के बीच फंसा देश
बगदाद से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, इराक इस युद्ध में सबसे कठिन स्थिति में है।
आर्थिक मजबूरी: इराक के तेल राजस्व का 90% हिस्सा न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व में जमा है, जिससे वह अमेरिका पर निर्भर है।
सुरक्षा संकट: जमीनी स्तर पर ईरान समर्थित मिलिशिया (PMF) सक्रिय हैं, जो इराकी सरकार के नियंत्रण से बाहर जाकर हमले कर रहे हैं। अब तक 50 इराकी नागरिकों की मौत इस संघर्ष में हो चुकी है, जो इराक की संप्रभुता पर बड़ा सवाल है।
4. वैश्विक ऊर्जा संकट: अप्रैल में ‘ब्लैकआउट’ का डर?
शेल (Shell) के सीईओ वाएल सावन की चेतावनी ने दुनिया भर के बाजारों में हड़कंप मचा दिया है।
सप्लाई चेन का टूटना: यदि युद्ध जारी रहा, तो अप्रैल 2026 तक यूरोप में ईंधन की भारी किल्लत हो सकती है।
कनाडा का उभार: कनाडा के ऊर्जा मंत्री टिम हॉजसन ने इसे “कनाडा का क्षण” (Canada’s Moment) बताया है, क्योंकि दुनिया अब खाड़ी देशों के बजाय सुरक्षित ऊर्जा विकल्पों की तलाश कर रही है।
निष्कर्ष और भारत पर प्रभाव
ईरान और इजरायल के बीच का यह सीधा टकराव भारत जैसे देशों के लिए चिंता का विषय है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के आसपास तनाव का सीधा मतलब है कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी और सप्लाई चेन में बाधा।
सऊदी अरब द्वारा अपने क्षेत्र में ड्रोन मार गिराए जाने की घटना यह दर्शाती है कि युद्ध की आग अब पड़ोसी देशों तक भी फैल रही है। यदि जल्द ही कोई ठोस युद्धविराम नहीं हुआ, तो दुनिया 2022 के रूस-यूक्रेन संकट से भी बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ सकती है।
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