– आयड़ जैन तीर्थ में चातुर्मासिक प्रवचन श्रृृंखला का चौथा दिन
– पदमावती माता का जाप एवं एकासना 7 जुलाई को

उदयपुर। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ पर बरखेड़ा तीर्थ द्वारिका शासन दीपिका महत्ता गुरू माता सुमंगलाश्री की शिष्या साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री आदि संतों का बुधवार को चातुर्मासिक मांगलिक प्रवचन हुए। महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में प्रवचनों की श्रृंखला में प्रात: 9.15 बजे साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री व वैराग्यपूर्णा ने कहा कि सामायिक समता की साधना है जो भी साधक अतीत काल में मोक्ष में गये हैं। वर्तमान काल में जा रहे है, गये है और भविष्य में जाएंगे यह सब सामायिक का प्रभाव है। सामायिक साधना में प्रवेश करने वाला साधक दो प्रतिज्ञाएं करता है। एक मैं समता भाव रखूंगा और दूसरा पाप मुक्त क्रियाएं न तो करूँगा, न करवाऊंगा। इन दोनों प्रतिज्ञाओं में सामायिक का संपूर्ण भाव समाविष्ट हो जाता है। दोनों में आत्म-विशुद्धि का लक्ष्य होता है।
साध्वी वैराग्यपूर्णा ने धर्मसभा में कहां कि जैसे पुष्पों का सा गंध है, सुगंध है, दूध का सार घृत है, तिल का सार तेल है। ऐस ही द्वादशांगी रूप जिनवाणी का सार सामायिक है। सामायिक आध्यात्मिक साधना है। सामायिक में मन बाहर भटकता हो, फिर भी साधक को घबराना नहीं चाहिए। वचन से मौन और काया को स्थिर रखते हुए मन को बार-बार राम- स्वभाव में प्रतिष्ठित करने का प्रयास करने चाहिए रहना चाहिए। सामायिक में प्रत्य शुद्धि, क्षेत्र शुद्ध काल शुद्धि एवं भाव शुद्धि की परम आवश्यकता रहती है।
जैन श्वेताम्बर महासभा के अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ पर प्रतिदिन चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला का आयोजन सुबह 9.15 बजे से होंगे। उन्होनें कहां कि शुक्रवार 7 जुलाई को पदमावती माता का जाप एवं एकासना किया जाएगा।
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