विद्यालयों की समस्याओं को जाना

उदयपुर। राजस्थान राज्य समाज कल्याण बोर्ड की सदस्या डॉ. दिव्यानी कटारा मंगलवार को जिले के चौरासी विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर रही। इस दौरान उन्होंने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गैंजी का निरीक्षण किया और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
विद्यालय पहुंचने पर प्रधानाचार्य जशोदा कलासुआ ने डॉ. कटारा का स्वागत किया व विद्यालय के नामांकन और समस्याओं के बारे में अवगत कराते हुए बताया कि मुख्य विद्यालय के कमरे जर्जर अवस्था में है और यहां कमरों की आवश्यकता है। उन्होंने बच्चों के लिए उच्च माध्यमिक स्तर पर उपयोगी संकाय खुलवानेकी मांग रखी ताकि बच्चों को उच्च अध्ययन के लिए दूर ना जाना पड़े।

डॉ. कटारा ने इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए विभाग के स्तर पर इस समस्या के समाधान के लिए आश्वस्त किया। उन्होंने विद्यालय विकास मद से जर्जर कक्षा-कक्षों की मरम्मत करवाने के निर्देश दिए।
इसके बाद उन्होंने राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय गैंजी का भी निरीक्षण किया, जहां प्राचार्य स्नेहलता जैन ने उनका स्वागत किया। इस दौरान बालिकाओं से संवाद करते हुए डॉ. दिव्यानी ने बालिकाओं के कॅरियर, शिक्षा, सुरक्षा संबंधित व अधिकारों के बारे में जानकारी दी।
सालमपुरा में महिला मंडल ने किया स्वागत :
उन्होंने सालमपुरा गांव के एंकलिंगजी के मंदिर दर्शन कर पूजा अर्चना की। यहां पाटीदार समाज की महिला मंडल ने उनका स्वागत किया। महिलाओं ने गांव में सीसी सड़क व पीने के पानी की समस्या बताई। झौंथरी पंचायत समिति की प्रधान अनिता खोखरिया ने गांव सालमपुरा में विभिन्न आवश्यकताओं के बारे में बताया। इस अवसर पर ग्राम पंचायत गैंजी के उपसरपंच कन्हैयालाल पंचाल व ग्राम विकास अधिकारी नाथूलाल पाटीदार व अनिल जैन, अरुण पाटीदार, दिलीप पाटीदार व समस्त ग्रामवासी शामिल हुए। अपने दौरे के दौरान दिव्यानी ने ग्रामीणों द्वारा अवगत कराई गई समस्याओं के बारे में सरकार को अवगत कराने व त्वरित निस्तारण कर राहत प्रदान करने का आश्वासन दिया।
उंटिया में राजीविका महिला समूहों को किया प्रोत्साहित :
इसके बाद डॉ. कटारा ने ग्राम पंचायत ऊटिया का दौरा किया जहां ग्राम विकास अधिकारी व सरपंच बंसीलाल आमलिया व राजीविका संस्था की महिला समूह ने उनका स्वागत किया गया व महिलाओं से बातचीत कर महिलाओं को घर की चारदीवारी से निकल कर अधिक से अधिक रोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने हस्तशिल्प कौशल से आजीविका अर्जन की जानकारी दी। उन्होंने वनोपज जैसे तेंदूपत्ता, महुआ उनसे बने उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने व इनके उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करने को आश्वस्त किया।
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