
दिव्यांगों को मिला फलाहार, प्रशांत अग्रवाल बोले— भूखे-प्यासे रहना नहीं, भगवान के निकट रहना ही सच्चा उपवास
सेवा परमो धर्म: देश के कोने-कोने से आए दिव्यांगजनों और उनके परिजनों के लिए की गई विशेष भोजन व फलाहार की व्यवस्था।
अटूट आस्था की कहानियां: ट्रेन हादसे और सड़क दुर्घटनाओं में अंग गंवा चुके दिव्यांगों ने साझा किए संघर्ष और नई उम्मीद के प्रेरक अनुभव।
उदयपुर। सेवा और समर्पण के वैश्विक केंद्र नारायण सेवा संस्थान में निर्जला एकादशी का पावन पर्व गहरे सेवा भाव, अटूट आस्था और अध्यात्म के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर संस्थान में निशुल्क सर्जरी और कृत्रिम अंग (आर्टिफिशियल लिम्ब्स) लगवाने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से आए दिव्यांग भाई-बहनों और उनके तीमारदारों के लिए फलाहार एवं मीठे भोजन की विशेष व्यवस्था की गई। पर्व के दौरान संस्थान परिसर में सेवा और आत्मचिंतन की एक अनूठी बयार देखने को मिली।
उपवास का वास्तविक अर्थ ‘ईश्वर के निकट निवास’ है: प्रशांत अग्रवाल
संस्थान में आयोजित “अपनों से अपनी बात” कार्यक्रम के दौरान संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने निर्जला एकादशी के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व को समझाते हुए कई प्रेरक बातें कहीं:
उपवास की अनूठी व्याख्या: प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि यह व्रत केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि आत्मा को परमात्मा के करीब ले जाने का एक पावन माध्यम है। हमारे ऋषि-मुनियों के अनुसार, उपवास शब्द ‘उप’ (निकट) और ‘वास’ (निवास) से मिलकर बना है, जिसका असली अर्थ ही भगवान के निकट रहना है।
तृष्णाओं पर विजय: सच्चा व्रत वही है जो मनुष्य के भीतर सकारात्मक बदलाव लाए। पानी की प्यास तो एक दिन में बुझ जाती है, लेकिन यदि मनुष्य के भीतर से धन, लोभ, मोह और अहंकार की तृष्णा खत्म न हो, तो वह जीवनभर परेशान रहता है। इस दिन का अनुष्ठान करने से वर्षभर की 24 एकादशियों के पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
दुःख जीवन की परीक्षा है: उन्होंने दिव्यांगजनों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि सोना भी अग्नि में तपकर ही निखरता है। दुःख जीवन की वह परीक्षा है जो इंसान को और मजबूत बनाती है। उन्होंने भक्त ध्रुव, विदुर, द्रौपदी, जटायु, शबरी और सुदामा के प्रसंगों का उदाहरण देते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बाद ही उन्हें प्रभु की असीम कृपा मिली थी।
कैलाश ‘मानव’ ने किया फल वितरण, महिलाओं को बांटी गईं चप्पलें और छाते
निर्जला एकादशी के पुण्य अवसर पर संस्थान के सेवादारों ने धरातल पर उतरकर जरूरतमंदों की मदद की।
रोगियों की सेवा: संस्थान के संस्थापक कैलाश ‘मानव’ ने खुद सेवाधाम का दौरा कर वहां उपचाराधीन रोगियों से मुलाकात की और उन्हें फल वितरित किए।
राहत सामग्री का वितरण: संस्थान की निदेशक वंदना अग्रवाल एवं पलक अग्रवाल ने बड़ी (उदयपुर) और उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आईं गरीब व जरूरतमंद महिलाओं को इस चिलचिलाती गर्मी और आगामी मानसून से राहत देने के लिए छाते, आम, जल कलश, वस्त्र और चप्पलों का वितरण किया।
जब छलक आए आंसू: दिव्यांगों ने बयां किया संघर्ष से सफलता का सफर
इस आध्यात्मिक संवाद के दौरान देश के अलग-अलग कोनों से आए दिव्यांगों ने अपने जीवन के दर्दनाक हादसों और नारायण सेवा संस्थान से मिले नए जीवन की कहानियां साझा कीं।
इन सभी दिव्यांगजनों ने भावुक होते हुए बताया कि किस प्रकार इस कठिन दौर में भी भगवान के प्रति उनकी आस्था कम नहीं हुई और नारायण सेवा संस्थान में आकर उन्हें जो निशुल्क इलाज और कृत्रिम अंग मिले हैं, उसने उनके जीवनयापन के लिए एक नया रास्ता खोल दिया है।
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