
उदयपुर। महाराष्ट्र के नासिक शहर में आयोजित हो रही राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में झीलों की नगरी उदयपुर के दो खेल दिग्गजों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 25 से 28 जून 2026 तक चलने वाली 14वीं सब जूनियर एवं जूनियर नेशनल पेंचक सिलाट चैंपियनशिप 2026 में उदयपुर के खेल अधिकारियों को बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
इस राष्ट्रीय मंच पर उदयपुर के प्रफुल्ल सांवरिया राजस्थान टीम के मुख्य कोच के रूप में खिलाड़ियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं, वहीं मनीष सालवी राष्ट्रीय रेफरी (निर्णायक) के रूप में मुस्तैदी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
खेल जगत में जिले का बढ़ा मान
उदयपुर पेंचक सिलाट एसोसिएशन के मुख्य सचिव हरीश कुमार सांवरिया ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर की इतनी प्रतिष्ठित और बड़ी प्रतियोगिता में उदयपुर के खेल अधिकारियों का मुख्य भूमिका में होना पूरे जिले और प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
पूरे उदयपुर और राजस्थान खेल परिवार की ओर से दोनों अधिकारियों और हमारी टीम को इस राष्ट्रीय खेल महाकुंभ में ऐतिहासिक प्रदर्शन के लिए ढेरों शुभकामनाएं
बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद: मुख्य सचिव ने विश्वास जताया कि प्रफुल्ल सांवरिया के तकनीकी अनुभव और कुशल मार्गदर्शन में राजस्थान की टीम इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित करेगी।
अनुभव का सम्मान: इसके साथ ही मनीष सालवी को नेशनल रेफरी के रूप में चुना जाना उनकी खेल के प्रति निष्पक्षता, योग्यता और लंबे अनुभव का सच्चा सम्मान है।
गौरतलब है कि नासिक में आयोजित हो रहे इस चार दिवसीय खेल महाकुंभ में देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सैकड़ों की संख्या में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। उदयपुर पेंचक सिलाट परिवार सहित स्थानीय खेल प्रेमियों ने दोनों अधिकारियों को बधाई देते हुए राजस्थान दल के उत्कृष्ट प्रदर्शन की कामना की है।
About Author
You may also like
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विजन : महिला सशक्तिकरण और सस्टेनेबल विकास से समृद्ध हो रहा राजस्थान
अधूरी मूरत में छिपा है पूर्ण जीवन का संदेश : जगन्नाथ रथयात्रा पर वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने दी शुभकामनाएं
रिसाइक्लिंग से बदला कल : हिंदुस्तान जिंक ने 23 अरब लीटर पानी को दिया नया जीवन
मेवाड़ की राजसी परंपरा और लोक-आस्था का महासंगम : जब शीतलामाता द्वार पर ठाकुर जी का स्वागत करने उमड़ा पूर्व राजपरिवार
जब परम्परा बनी पूजा और श्रद्धा बनी विरासत… मेवाड़ की सदियों पुरानी राजपरम्परा के तहत डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने श्री जगन्नाथ रायजी को अर्पित किए पोशाक एवं भोग
