
उदयपुर। विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी और चांदी के शीर्ष 10 उत्पादकों में शुमार हिंदुस्तान जिंक (वेदांता समूह) ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत ग्रामीण शिक्षा जगत में एक मिसाल पेश की है। कंपनी द्वारा संचालित प्रमुख कार्यक्रम ‘शिक्षा संबल’ के माध्यम से राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों के 76 सरकारीकों में विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस अनूठी पहल के अंतर्गत वर्ष 2018 से अब तक 47,000 से अधिक विद्यार्थियों को विज्ञान, गणित और अंग्रेजी (GME) जैसे कठिन माने जाने वाले विषयों पर विशेष ध्यान देते हुए निरंतर शैक्षणिक सहायता प्रदान की गई है।
समर कैंप: 1,600 छात्रों को मिला व्यावहारिक और तकनीकी ज्ञान
विद्यार्थियों को व्यावहारिक सीख (Practical Learning) देने और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से हाल ही में 9वें समर कैंप का सफल आयोजन किया गया, जिसमें 1,600 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
एक महीने का विशेष कैंप: गर्मी की छुट्टियों में पढ़ाई की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह एक महीने का रेजिडेंशियल (आवासीय) और नॉन-रेजिडेंशियल (गैर-आवासीय) समर कैंप अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, सलूम्बर और उदयपुर जिलों में आयोजित किया गया।
स्टेम (STEM) और डिजिटल शिक्षा पर जोर: कैंप के दौरान बच्चों को विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के साथ-साथ डिजिटल तकनीक, नवाचार (Innovation), कला, खेल और नेतृत्व विकास जैसी गतिविधियों का व्यावहारिक अनुभव मिला।
दिग्गज संस्थानों का सहयोग: इस अभियान में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और आईआईएसईआर (IISER) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के वालंटियर्स, हिंदुस्तान जिंक के कर्मचारियों और स्थानीय समुदाय ने सक्रिय योगदान दिया।
बोर्ड परीक्षाओं में शानदार रिकॉर्ड: 37 स्कूलों का रहा 100% रिजल्ट
‘शिक्षा संबल’ कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता इस वर्ष (2026) के बोर्ड परीक्षा परिणामों में देखने को मिली है, जिसने राज्य के औसत परिणामों को काफी पीछे छोड़ दिया है। अगर परीक्षा परिणामों पर नजर डालें, तो कक्षा 10वीं में शिक्षा संबल का परिणाम 92.53 प्रतिशत रहा, जबकि कक्षा 12वीं में यह आंकड़ा 99.43 प्रतिशत के शानदार स्तर पर पहुंच गया।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाले 76 स्कूलों में से 37 स्कूलों ने 100 प्रतिशत बोर्ड परीक्षा परिणाम हासिल किया है। जहां पिछले 10 वर्षों में इन ग्रामीण क्षेत्रों का औसत परिणाम लगभग 67.66 प्रतिशत के आसपास रहता था, वहीं ‘शिक्षा संबल’ के प्रयासों से अब यह ग्राफ सुधरकर कुल मिलाकर लगभग 96 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
“किताबों से बाहर निकलकर असल जिंदगी की तकनीक को समझा” — लाभार्थियों के अनुभव
इस कार्यक्रम और समर कैंप का हिस्सा रहे विद्यार्थियों ने अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को साझा किया: भावेश मेनारिया (गवार्डी, राजसमंद): “कैंप से पहले मैंने स्टेम (STEM) और डिजिटल टूल्स के बारे में सिर्फ किताबों में पढ़ा था। यहाँ प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स करने से मुझे समझ आया कि टेक्नोलॉजी असली जिंदगी की समस्याओं का समाधान कैसे दे सकती है।”
प्रीति राव (भीलवाड़ा): “कैंप में भाग लेने से मेरी कम्युनिकेशन (संचार), समस्या समाधान और डिजिटल स्किल्स काफी बेहतर हुई हैं। नई चीजें सीखने से मुझे जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है।”
मोहित मीणा (उदयपुर – वर्तमान में IISER पुणे के छात्र): “शिक्षा संबल ने मेरी पढ़ाई की नींव को बहुत मजबूत किया। इसी बेहतरीन गाइडेंस की वजह से आज मैं देश के इतने बड़े और प्रतिष्ठित संस्थान में उच्च शिक्षा पा रहा हूँ।”
सतत विकास और 26 लाख लोगों तक पहुंच
हिंदुस्तान जिंक सीएसआर के माध्यम से केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि कौशल विकास, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर भी व्यापक स्तर पर काम कर रही है। वर्तमान में कंपनी देश के 4,100 से अधिक गांवों में अपनी मजबूत पहुंच के साथ 26 लाख से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है और वर्ष 2030 तक सतत विकास (Sustainable Development) के लक्ष्यों को पूर्णतः हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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