नई दिल्ली/चंडीगढ़।उत्तर भारत में लोहड़ी का पर्व मंगलवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर सहित कई राज्यों में लोगों ने लोहड़ी की पवित्र अग्नि जलाकर सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। यह पर्व हर वर्ष मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व मनाया जाता है और इसका सीधा संबंध फसल, प्रकृति और अग्नि देव की उपासना से जुड़ा हुआ है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लोहड़ी की अग्नि शुद्धि और परिवर्तन का प्रतीक मानी जाती है। अग्नि में आहुति देने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। हालांकि, शास्त्रों और लोक परंपराओं में कुछ ऐसी वस्तुओं का भी उल्लेख है, जिन्हें लोहड़ी की आग में डालना अशुभ माना जाता है।इन वस्तुओं को अग्नि में डालने से बचेंधार्मिक मान्यताओं के अनुसार लोहड़ी की आग में प्लास्टिक से बनी वस्तुएं डालना वर्जित है, क्योंकि यह न केवल धार्मिक रूप से अशुद्ध मानी जाती हैं बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाती हैं। इसके अलावा नमक को भी अग्नि में नहीं डालना चाहिए, क्योंकि इसे नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है।जूठा या अशुद्ध भोजन, फटे या गंदे कपड़े भी अग्नि में अर्पित करना अशुभ माना जाता है, क्योंकि ये दरिद्रता और नकारात्मकता के प्रतीक समझे जाते हैं।अग्नि में क्या डालना माना जाता है शुभलोहड़ी के अवसर पर तिल और गुड़ को अग्नि में अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। तिल संयम और पवित्रता का प्रतीक है, जबकि गुड़ मिठास और आपसी प्रेम को दर्शाता है।इसके साथ ही मूंगफली, रेवड़ी, ज्वार, मक्का, चना, चावल और गन्ना तथा उससे बने पदार्थ अग्नि में अर्पित किए जाते हैं। ये सभी नई फसल, अन्न समृद्धि और आर्थिक खुशहाली के प्रतीक माने जाते हैं।धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से लोहड़ी पूजन करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। इसी आस्था के साथ लोगों ने लोहड़ी का पर्व हर्षोल्लास से मनाया।
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