प्रधानमंत्री ने पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित किया: बोले—डिजिटल युग की चुनौतियों का समाधान दे रही है भारत की प्रतिभा

पेरिस/नई दिल्ली

 प्रधानमंत्री ने 18 जून 2026 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में भारतीय समुदाय के एक विशाल जनसमूह को संबोधित किया। कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने पर प्रवासी भारतीयों ने प्रधानमंत्री का गर्मजोशी और उत्साहपूर्ण स्वागत किया, जो अपनी मातृभूमि के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने फ्रांस के विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय समुदाय के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय नवाचार (इनोवेशन) और विचारों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने और भारत-फ्रांस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में प्रवासियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत-फ्रांस के बीच मजबूत होते जन-संबंध

  • आवाजाही हुई आसान: बड़ी संख्या में भारतीय छात्र, प्रोफेशनल और पर्यटक फ्रांस को अपना गंतव्य बना रहे हैं, जिसके लिए दोनों देशों ने लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के कई कदम उठाए हैं।

  • फ्रांस में यूपीआई (UPI) का बढ़ता प्रभाव: प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि फ्रांस में यूपीआई के बढ़ते चलन से दोनों देशों के बीच पर्यटन के प्रवाह को और अधिक गति मिलेगी।

भारत में हो रहे परिवर्तनकारी बदलाव और उपलब्धियां

प्रधानमंत्री ने भारत के विकास मॉडल को दुनिया के सामने रखते हुए कई अहम बातें रेखांकित कीं:

  1. गरीबी उन्मूलन: पिछले 12 वर्षों में भारत ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने में सफलता हासिल की है।

  2. समावेशी और महिला-नेतृत्व विकास: भारत में हो रहे बदलावों में महिला-नेतृत्व वाले विकास और मानव-केंद्रित एआई (AI) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की प्रगति शामिल है।

  3. अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते: यूके (UK) और यूरोपीय संघ (EU) के साथ संपन्न हुए व्यापार समझौते भारतीय श्रमिकों, किसानों और इनोवेटर्स के लिए वैश्विक स्तर पर नए अवसर खोलेंगे।

वैश्विक मंच पर तकनीक और विश्वास का प्रतीक बना भारत

पेरिस के ‘विवटेक 2026’ और नीस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स 2026’ में भारत की भागीदारी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ मंच आज इनोवेशन डिप्लोमेसी का एक बेहतरीन मॉडल बन चुका है। भारत वैश्विक समुदाय के लिए प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सबसे पसंदीदा भागीदार बनकर उभरा है।

एवियन में जी7 (G7) शिखर सम्मेलन में अपनी भागीदारी पर चर्चा करते हुए उन्होंने जोर दिया कि भारत एक ऐसी विश्वास-आधारित अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बनाने के लिए दृढ़ता से खड़ा है, जहाँ ‘ग्लोबल साउथ’ को एक समान भागीदार का दर्जा मिले।

प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि भारत की प्रतिभा, कौशल और नवाचार आज डिजिटल युग की हर चुनौती का समाधान खोजने में दुनिया की मदद कर रहे हैं। उन्होंने प्रवासी भारतीयों को ‘विकसित भारत’ की इस विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बनने के लिए आमंत्रित किया।

About Author

Leave a Reply