
सस्टेनेबल माइनिंग और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में ऐतिहासिक कदम
उदयपुर। वेदांता ग्रुप की कंपनी और विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड, ने भारत के माइनिंग सेक्टर में एक नया बेंचमार्क स्थापित करते हुए राजस्थान की रामपुरा आगुचा माइंस में भारत की पहली जिंक टेलिंग्स रीसाइक्लिंग फैसिलिटी के विकास की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी और नवाचार-आधारित परियोजना के लिए कंपनी ने सीआईएमआईसी ग्रुप की कंपनियों – सेडगमैन और लेटन एशिया को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट प्रदान किए हैं।
यह अत्याधुनिक फैसिलिटी पहले से प्रोसेस किए गए टेलिंग्स से जिंक और चांदी जैसी कीमती धातुओं की रिकवरी के लिए एडवांस्ड रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी का उपयोग करेगी। पारंपरिक रूप से वेस्ट माने जाने वाले टेलिंग्स को मूल्यवान संसाधनों में बदलते हुए, यह पहल सर्कुलर माइनिंग अप्रोच को मजबूती देती है और रिसोर्स एफिशिएंसी के नए मानक स्थापित करती है।
यह प्रोजेक्ट भारत की आवश्यक मिनरल्स सिक्योरिटी, सर्कुलर इकोनॉमी और सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल ग्रोथ को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। पुराने वेस्ट से नई वैल्यू क्रिएट कर, यह फैसिलिटी पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने, भूमि के बेहतर उपयोग और देश की दीर्घकालिक रिसोर्स सुरक्षा को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगी।
हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा, “भारत के औद्योगिक विकास का भविष्य केवल अधिक माइनिंग पर नहीं, बल्कि मौजूदा संसाधनों के बुद्धिमान और जिम्मेदार उपयोग पर निर्भर करता है। यह प्रोजेक्ट एक्सट्रैक्शन से ऑप्टिमाइजेशन और लीनियर कंजम्पशन से सर्कुलर वैल्यू क्रिएशन की ओर एक मूलभूत बदलाव को दर्शाता है। भारत की पहली जिंक टेलिंग्स रीसाइक्लिंग फैसिलिटी स्थापित कर, हम यह दिखा रहे हैं कि पुराने रिसोर्स कैसे भविष्य की सप्लाई बन सकते हैं। सेडगमैन और लेटन एशिया के साथ हमारा सहयोग जिम्मेदार और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन माइनिंग के नए बेंचमार्क स्थापित करेगा।”
यह डेवलपमेंट हिन्दुस्तान जिंक की प्रोडक्शन कैपेसिटी को दोगुना करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। अगस्त में, कंपनी के बोर्ड ने रामपुरा आगुचा में 10 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाली इस फैसिलिटी के लिए ₹3,823 करोड़ तक के निवेश को मंजूरी दी थी, जिसे जीरो डेट से 28 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है।
कॉन्ट्रैक्ट के तहत, सेडगमैन अपनी ग्लोबल मिनरल्स प्रोसेसिंग विशेषज्ञता के साथ डिटेल इंजीनियरिंग और ऑफशोर इक्विपमेंट प्रोक्योरमेंट संभालेगा, जबकि भारत में मजबूत उपस्थिति रखने वाली लेटन एशिया ऑनशोर प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन का प्रबंधन करेगी। यह सहयोग ग्लोबल एक्सपर्टाइज और लोकल एग्जीक्यूशन का बेहतरीन संगम प्रस्तुत करता है।
सीआईएमआईसी ग्रुप के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन जुआन सैंटामारिया ने कहा कि यह प्रोजेक्ट ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन को सपोर्ट करने और महत्वपूर्ण मिनरल्स डेवलपमेंट के लिए ग्रुप की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वहीं, सेडगमैन और लेटन एशिया के नेतृत्व ने इस साझेदारी को भारत के माइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, क्षेत्रीय विकास और स्थानीय रोजगार सृजन के लिए एक मजबूत अवसर बताया।
उदयपुर मुख्यालय वाली हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड राजस्थान और उत्तराखंड में जिंक, लेड और सिल्वर की अंडरग्राउंड माइंस और स्मेल्टर्स संचालित करती है। कंपनी भारत में जिंक की बढ़ती मांग को देखते हुए अगले पांच से दस वर्षों में लगभग ₹12,000 करोड़ के निवेश के साथ अपने माइनिंग और मेटल प्रोडक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रही है।
एक लिस्टेड कंपनी के रूप में, हिन्दुस्तान जिंक मजबूत गवर्नेंस, पारदर्शिता और सस्टेनेबिलिटी के उच्चतम मानकों का पालन करती है। कंपनी को एसएंडपी ग्लोबल कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट 2025 द्वारा लगातार तीसरे वर्ष विश्व की सबसे सस्टेनेबल मेटल्स और माइनिंग कंपनी के रूप में मान्यता दी गई है। साथ ही, यह इंटरनेशनल काउंसिल ऑन माइनिंग एंड मेटल्स (ICMM) की भारत की पहली सदस्य कंपनी है, जो इसके जिम्मेदार माइनिंग लीडरशिप को और सुदृढ़ करती है।
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