पेपरलीक पर प्रहार और विकास की रफ़्तार : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पेश किया दो साल का ‘रिपोर्ट कार्ड’

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में गुरुवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस का जवाब देते हुए अपनी सरकार के दो वर्षों का लेखा-जोखा सदन के पटल पर रखा। मुख्यमंत्री का यह संबोधन केवल उपलब्धियों का बखान नहीं था, बल्कि पिछली सरकार के साथ तुलनात्मक विश्लेषण और भविष्य के ‘विकसित राजस्थान’ का एक ठोस विजन दस्तावेज भी था।

युवाओं का भरोसा और पेपरलीक के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत युवाओं के दर्द को छूते हुए की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने पेपरलीक के कलंक को धोने के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 140 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 428 अपराधी जेल की सलाखों के पीछे हैं। उन्होंने युवाओं को आश्वस्त किया कि नियुक्तियों का दौर शुरू हो चुका है—जहाँ एक लाख युवाओं को नियुक्तियाँ दी जा चुकी हैं, वहीं एक लाख 55 हजार भर्तियाँ प्रक्रियाधीन हैं।

आर्थिक सुधार: राजस्व घाटे में 8 हजार करोड़ की कमी

वित्तीय स्थिति पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें विरासत में ‘खाली खजाना’ और ‘भारी कर्ज’ मिला था, लेकिन कुशल वित्तीय प्रबंधन से राजस्थान की अर्थव्यवस्था अब पटरी पर लौट रही है। उन्होंने गौरवान्वित होकर बताया कि सरकार केवल दो वर्षों में राजस्व घाटे को करीब 8,000 करोड़ रुपये कम करने में सफल रही है। केंद्र के साथ ‘डबल इंजन’ समन्वय का लाभ देते हुए उन्होंने रिकॉर्ड 19 हजार करोड़ रुपये की पूंजीगत निवेश सहायता प्राप्त करने का भी उल्लेख किया।

जल सुरक्षा: प्यासे राजस्थान के लिए ‘रामजल सेतु’ का संकल्प

राजस्थान की सबसे बड़ी समस्या ‘पानी’ पर मुख्यमंत्री ने दीर्घकालिक समाधानों का खाका खींचा। उन्होंने यमुना जल समझौते को अंतिम चरण में बताया और ‘रामजल सेतु परियोजना’ (ERCP का नया स्वरूप) के तहत बांधों में जल संग्रहण शुरू होने को एक बड़ी सफलता करार दिया। जल जीवन मिशन के तहत 14 लाख नए परिवारों को नल से जोड़ना उनकी सरकार की ग्रामीण क्षेत्रों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।

पर्यावरण और संस्कृति: खेजड़ी के लिए बनेगा नया कानून

विकास की अंधी दौड़ के बीच मुख्यमंत्री ने राजस्थान की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहचान को बचाने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि राजस्थान के ‘कल्पवृक्ष’ खेजड़ी को बचाने के लिए उनकी सरकार एक विशेष कानून लाएगी। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रदेश में 20 करोड़ पौधे लगाना और आगामी वर्षों में इसे 50 करोड़ तक ले जाना पर्यावरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता जाहिर करता है।

किसान और महिला कल्याण: सीधे खातों में पहुँची राहत

किसानों के प्रति अपनी सरकार का समर्पण दिखाते हुए उन्होंने बताया कि किसान सम्मान निधि को दो वर्षों में ही डेढ़ गुना किया जा चुका है। बिजली के क्षेत्र में भी बड़े बदलावों का जिक्र करते हुए उन्होंने सौर ऊर्जा क्षमता में 19,209 मेगावाट की ऐतिहासिक वृद्धि की बात कही। साथ ही, महिलाओं को 450 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर देना और लखपति दीदी योजना के जरिए लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा।

औद्योगिक क्रांति का उदय: राइजिंग राजस्थान

मुख्यमंत्री ने अंत में राजस्थान को औद्योगिक हब बनाने के अपने संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि ‘राइजिंग राजस्थान’ के माध्यम से हुए 35 लाख करोड़ रुपये के एमओयू में से 8 लाख करोड़ का निवेश धरातल पर उतरना शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह सरकार के उन 34 नीतिगत निर्णयों का परिणाम है जो राजस्थान को देश की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के प्रधानमंत्री के सपने में योगदान देंगे।

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