बांसवाड़ा। लोकसभा चुनाव 2024 में राजस्थान की डूंगरपुर-बांसवाड़ा सीट पर एक रोमांचक सियासी मुकाबला देखने को मिला। यहां तीन राजकुमारों ने चुनावी मैदान में अपनी चालों से सभी को चौंका दिया। इनकी कहानी किसी शतरंज के खेल से कम नहीं रही, जिसमें हर चाल ने नया मोड़ लिया।
बीजेपी ने चुनाव से पहले एक बड़ा सियासी दांव खेलते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी नेता महेंद्रजीत मालवीया को अपनी पार्टी में शामिल किया और उन्हें टिकट दिया। मालवीया राजनीति के अनुभवी खिलाड़ी हैं, जो हर दांव-पेच में माहिर माने जाते हैं। लेकिन इस बार मुकाबला कड़ा था, क्योंकि दो और राजकुमारों ने भी मोर्चा संभाल रखा था।
पहला राजकुमार: भारतीय आदिवासी पार्टी (बाप) के उम्मीदवार राजकुमार रोत। उन्होंने चुनाव में बाजी मारते हुए मालवीया को बड़े अंतर से हराया।
दूसरे और तीसरे राजकुमार: मालवीया ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए खुद के प्रत्याशी उतारे। इनमें से एक थे राजकुमार पुत्र हीरालाल और दूसरे राजकुमार पुत्र प्रेमजी। परिणामस्वरूप, राजकुमार पुत्र हीरालाल को 74,598 वोट और राजकुमार पुत्र प्रेमजी को 41,790 वोट मिले। इसके बावजूद, राजकुमार रोत ने मालवीया को 2,47,054 वोटों से पराजित कर दिया।
इस सियासी जंग को और पेचीदा बनाते हुए, कांग्रेस ने अरविंद सीता डामोर को उम्मीदवार घोषित किया था। गठबंधन की प्रक्रिया के दौरान, जब अरविंद को नामांकन वापस लेने के लिए कहा गया, तो वे अचानक गायब हो गए। इसके पीछे भी मालवीया का हाथ होने की चर्चा थी। हालांकि, अरविंद ने नामांकन वापस नहीं लिया, और अंततः कांग्रेस ने बाप प्रत्याशी को समर्थन दिया। इसके बावजूद अरविंद को 61,211 वोट मिले।
इस चुनावी समर में अन्य भी मैदान में थे। बहुजन समाज पार्टी के दिलीप मीणा को 8,591 वोट, इंडियन पीपल्स ग्रीन पार्टी के शंकरलाल बामनिया को 17,188 वोट, निर्दलीय बंसीलाल अहारी को 17,896 वोट और नोटा को 20,970 वोट मिले।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मालवीया और बीजेपी की यह हार एक बड़ी रणनीतिक असफलता है। इस हार ने मालवीया के राजनीतिक करियर पर भी एक बड़ा विराम लगा दिया है। यह चुनाव साबित करता है कि राजनीति में हर चाल की अहमियत होती है, और कभी-कभी खेल में सबसे अनुभवी खिलाड़ी भी मात खा जाते हैं।
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