
उदयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए एसीबी (ACB) ने जल जीवन मिशन घोटाले में बैठे मगरमच्छों को दबोच लिया है। मंगलवार तड़के हुई इस छापेमारी में पीएचईडी (PHED) के चीफ इंजीनियर दिनेश गोयल को उदयपुर के आलीशान ताज अरावली होटल से गिरफ्तार किया गया, जबकि एक अन्य आरोपी एक्सईएन विशाल सक्सेना को बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरते ही दबोच लिया गया।
इन बड़े नामों पर गिरी गाज : ‘साहब’ से लेकर ‘सलाहकार’ तक जेल में
एसीबी की टीमों ने जयपुर, बाड़मेर, सीकर, दिल्ली और झारखंड सहित 15 ठिकानों पर एक साथ धावा बोला। गिरफ्तार होने वालों में दिनेश गोयल : तत्कालीन मुख्य अभियंता (PHED)। केडी गुप्ता : चीफ इंजीनियर, जयपुर शहर। विशाल सक्सेना : एक्सईएन (निलंबित), जिन्हें बाड़मेर स्टेशन से हिरासत में लिया गया।
शुभांशु दीक्षित : अतिरिक्त मुख्य अभियंता।
रिटायर्ड दिग्गज : डीके गौड़ (तकनीकी चीफ) और अरुण श्रीवास्तव जैसे रिटायर्ड अफसर भी नहीं बच सके।
घोटाले का तरीका : फर्जी सर्टिफिकेट और ‘अपनों’ को फायदा
जांच में सामने आया कि यह महज आर्थिक भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी।
फर्जी दस्तावेज : मैसर्स श्रीगणपति और श्रीश्याम ट्यूबवेल कंपनियों ने इरकॉन (IRCON) के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनाकर 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए।
55 करोड़ का फर्जी भुगतान : बिना किसी काम के कंपनियों को करोड़ों का पेमेंट कर दिया गया।
पारदर्शिता की हत्या : टेंडर की शर्तों में जानबूझकर ‘साइट इंस्पेक्शन’ जैसी शर्तें जोड़ी गईं, ताकि यह पता चल सके कि कौन सी कंपनी बोली लगा रही है और उन्हें अनुचित लाभ दिया जा सके।
एसआईटी (SIT) का शिकंजा : 139 इंजीनियरों की धड़कनें तेज
एसीबी की एसआईटी इस समय 20 हजार करोड़ के चार अहम प्रोजेक्ट्स की जांच कर रही है। इस घोटाले की जड़ें इतनी गहरी हैं कि इसमें 15 एक्सईएन, 40 एईएन और 50 जेईएन सहित कुल 139 इंजीनियर जांच के रडार पर हैं।
विशाल सक्सेना का ‘केरल कनेक्शन
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब जांच में पता चला कि एक्सईएन विशाल सक्सेना ने फर्जी टेंडर्स को बचाने के लिए केरल जाकर झूठी रिपोर्ट पेश की थी। उन्हें लगा था कि विरात्रा माता के दर्शन के लिए बाड़मेर पहुंचने पर वे बच निकलेंगे, लेकिन एसीबी की टीम स्टेशन पर उनका ‘इंतजार’ कर रही थी।
सिस्टम की सफाई की शुरुआत
पिछली सरकार के समय हुए इस घोटाले ने जल जीवन मिशन जैसे पवित्र उद्देश्य को दागदार कर दिया था। एसीबी की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई ने यह संदेश दे दिया है कि भ्रष्टाचार चाहे फाइव स्टार होटल की दीवारों के पीछे छिपा हो या रिटायरमेंट के सुकून में, कानून के लंबे हाथ वहाँ तक पहुँच ही जाएंगे।
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