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मगर पारस की बेचैनी को इसी कुर्सी ने समझा है…जिसे बरसों की तपस्या के बाद आज पारस ने संभाला है
कोई दीवाना कहता है, कोई मस्ताना समझता है, मगर कुर्सी की बेचैनी को बस
कोई दीवाना कहता है, कोई मस्ताना समझता है, मगर कुर्सी की बेचैनी को बस