
उदयपुर। पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) तथा दीव टूरिज्म व बाल भवन बोर्ड द्वारा दीव में आयोजित राष्ट्रीय कला शिविर का समापन बुधवार को किया जाएगा। इस दौरान शिविर का भव्य समापन समारोह व संभागियों द्वारा तैयार की गई पेंटिंग्स की प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।
इस शिविर में उदयपुर से प्रतिभावान चित्रकार डॉ. प्रेषिका द्विवेदी, प्रो.राजेश यादव और सोनम फुलवारिया भाग लेकर लोक संस्कृति को रंगों से सजा रहे हैं। डॉ प्रेषिका इस शिविर में अमूर्त चित्रण से दीव के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ऐतिहासिक तथ्यों को अपनी तूलिका से स्वरूप दे रही हैं।
’युद्धपोत आईएनएस खुकरी ने मन मोहा’ः
शिविर में भाग ले रही शहर की कलाकार डॉ प्रेषिका द्विवेदी द्वारा आईएनएस खुकरी के प्रतीकात्मक चित्रण की दीव कलक्टर भानुप्रभा ने काफी प्रशंसा की। प्रेषिका ने बताया कि खुकरी भारतीय नौसेना का एक युद्धपोत था। 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान, वह 9 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान की पनडुब्बी द्वारा दागे गए तीन टॉरपीडो का शिकार हो गया और दीव के तट से 40 समुद्री मील दूर डूब गया था। भारतीय नौसेना के महावीर चक्र (मरणोपरांत), कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला, जो उस समय जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ने युद्धपोत के साथ नीचे जाने का फैसला किया। मुल्ला और उनका बहादुर दल भारतीय नौसेना की अडिग भावना और अदम्य साहस का चमकदार उदाहरण है। उन्होंने बताया कि यह चित्र वीर सपूतों को सादर श्रद्धांजलि प्रेषित करता है।
प्रेषिका का मानना है कि एक सफल कलाकार वह है जो आत्मसंतुष्टि के लिए काम करता है। इसलिए वे हमेशा कला, व्यवसाय, प्रौद्योगिकी, शैली के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करती हैं। पेंटिंग और ग्राफिक दोनों ही कौशल की धनी प्रेषिका अमूर्त संयोजन को पूरी निष्ठा से निभाती है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में डॉ प्रेषिका, सेठ मथुरादास बिनानी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नाथद्वारा में चित्रकला विषय की सहायक आचार्य है। उन्हें बचपन से ही पेंटिंग का शौक था और उन्होंने सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर से विजुअल आर्ट्स में पीएचडी की उपाधि ली है। साथ ही उन्होंने कथक नृत्य में सीनियर डिप्लोमा भी लिया है। उनके काम में कला के विभिन्न माध्यमों की एक बहुमुखी श्रृंखला शामिल है। उनका काम आमतौर पर अमूर्त कला रचना के साथ-साथ कई बार भावनात्मक, सामाजिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक पहलुओं पर केंद्रित होता है। प्रेषिका के काम का माध्यम कैनवास पर ऐक्रेलिक और कैनवास पर कोलाज है, जहां अंतराल विभाजन के साथ बनावट व मूल्यों का प्रभुत्व जीवंत होता है। वह कलाकार के रूप में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कार्यशालाओं में भाग लेती रही हैं।
About Author
You may also like
-
उदयपुर में जिंक कौशल द्वारा आयोजित मेगा रोजगार मेला बना युवाओं के लिए सुनहरा अवसर
-
Sachin Tendulkar Invites PM Modi to Son Arjun’s Wedding…Who else was invited? See the pictures here.
-
ज़मीन की गहराइयों से आसमान छूने का जज़्बा : हिंदुस्तान जिंक का शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन अभियान
-
मुंबई : मेयर पद के लिए भाजपा ने ऋतु तावड़े को उतारा, उपमहापौर पद पर शिवसेना के संजय घाड़ी
-
भारत में ऊर्जा क्रांति : हिंदुस्तान जिंक और JNCASR ने विकसित की स्वदेशी जिंक-आयन बैटरी तकनीक, रिन्यूएबल एनर्जी स्टोरेज की बदली तस्वीर