
उदयपुर। उदयपुर के बहुप्रतीक्षित एलिवेटेड रोड परियोजना के लिए आखिरकार टेंडर जारी कर दिया गया है। यह महत्वपूर्ण परियोजना सिटी स्टेशन से जिला कलेक्टर निवास तक बनाई जाएगी, जिसकी कुल लागत 179.14 करोड़ रुपये आंकी गई है। दो साल में पूरी होने वाली इस परियोजना के लिए सिटी विधायक ताराचंद जैन की इच्छाशक्ति और पूर्व गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया के साथ-साथ शहरवासियों का सहयोग निर्णायक साबित हुआ।
MLA ताराचंद जैन की दृढ़ इच्छाशक्ति :
ताराचंद जैन की दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयासों के चलते यह परियोजना अब धरातल पर उतरने वाली है। पिछले कई वर्षों से लंबित पड़ी इस परियोजना को फिर से शुरू करने में उन्होंने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गुलाबचंद कटारिया और शहरवासियों का योगदान:
पूर्व गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने भी इस परियोजना के लिए निरंतर समर्थन दिया। इसके साथ ही, शहरवासियों के सहयोग और समर्थन ने भी इस परियोजना को हकीकत में बदलने में मदद की।
अब कोई नहीं रोक सकता :
एलिवेटेड रोड परियोजना के टेंडर के जारी होने के साथ, अब इस महत्वाकांक्षी योजना को आगे बढ़ने से कोई भी नहीं रोक सकता। महापौर जीएस टांक ने भी इस परियोजना को फिर से जीवित करने में अहम भूमिका निभाई, जिसके चलते यह टेंडर जारी हो सका। इस रोड का निर्माण दो साल में पूरा होगा और 10 साल तक इसका रखरखाव करने वाली कंपनी की ज़िम्मेदारी होगी।
इस महत्वपूर्ण परियोजना के पूरा होने से उदयपुर के यातायात में सुधार आएगा और शहर का बुनियादी ढांचा भी मजबूत होगा।
प्रमुख बिंदु:
- एलिवेटेड रोड का निर्माण:
यह एलिवेटेड रोड सिटी स्टेशन से कलेक्टर निवास तक जाएगी, जिसमें दो लेन का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा, कोर्ट चौराहा से चेतक सर्कल की ओर एक अतिरिक्त लेन भी बनाई जाएगी, जिसकी चौड़ाई 5.5 मीटर होगी। यह निर्माण कार्य दो साल के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। - कंपनी की ज़िम्मेदारी:
टेंडर लेने वाली कंपनी को न केवल दो साल में निर्माण कार्य पूरा करना होगा, बल्कि अगले 10 साल तक इस रोड के रखरखाव की ज़िम्मेदारी भी निभानी होगी। इस शर्त के साथ निगम ने कंपनी की गारंटी सुनिश्चित की है। - लंबी लड़ाई के बाद मिली मंजूरी:
इस एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए नगर निगम ने एक लंबी और कठिन लड़ाई लड़ी है। 10 साल पहले जब इस परियोजना का प्रस्ताव आया था, तो उसे भारी विरोध का सामना करना पड़ा था और यह फाइल निगम में दबी रह गई थी। महापौर जीएस टांक के निर्देशन में इस परियोजना को पुनर्जीवित किया गया। इसके बाद उच्च न्यायालय से मंजूरी और राज्य सरकार से बजट स्वीकृति प्राप्त करने के बाद, टेंडर जारी किया गया। - आगे की प्रक्रिया:
टेंडर में रुचि रखने वाली कंपनियों के लिए 29 अगस्त को नगर निगम में एक बैठक आयोजित की जाएगी, जहां वे टेंडर की शर्तों पर अपने सुझाव दे सकेंगी। निगम द्वारा इन सुझावों पर विचार कर 5 सितंबर को अंतिम निर्णय लिया जाएगा। 18 सितंबर की शाम तक टेंडर सबमिट किया जा सकता है, और 19 सितंबर को तकनीकी बोलियों का खुलासा होगा।
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