
सांगवा (मावली उदयपुर) ।
“मैं इस वक्त मावली की सांगवा पंचायत में हूं, जहां रात के अंधेरे को चीरते हुए एक रोशनी आई है – ये रोशनी है जिला प्रशासन की… और खुद जिला कलेक्टर नमित मेहता ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं। जी हां, ये कोई औपचारिक मीटिंग नहीं, बल्कि एक ज़िंदा चौपाल है – जहां गांव की आवाज़ सीधे जिले की कुर्सी तक पहुंच रही है।”
“प्रदेश के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के निर्देशों पर चल रही इस रात्रि चौपाल श्रृंखला में गत रात सांगवा में 52 परिवाद सामने आए… और खास बात ये – एक भी मामला ऐसा नहीं था जिसे कलक्टर ने टाल दिया हो।”
गांव वाले बोले -“हम तो समझे ही नहीं कि कलेक्टर साहब खुद आ जाएंगे… हमने जो कहा, वो सुना और तुरंत कहा – ‘इसका समाधान करो।’ पहली बार लगा जैसे सरकार हमारे आंगन में उतर आई हो।”
“पेयजल संकट हो, आधार कार्ड की दिक्कत या स्पीड ब्रेकर की मांग – हर मुद्दे पर कलक्टर मेहता ने संबंधित अफसरों को वहीं बैठकर आदेश दिए। और जहां सड़क की बात आई – सांगवा से लिम्बुआ तक डामर सड़क की मांग पर तुरन्त बोले – ‘डीएमएफटी से प्रस्ताव बनाओ, काम शुरू हो।'”
“चौपाल में महिलाओं की भागीदारी भी देखने लायक रही – उन्होंने खुलकर अपने मुद्दे सामने रखे और जिला प्रशासन ने उन्हें गंभीरता से सुना।”
“इतने सालों में पहली बार देखा कि अधिकारी हमसे नीचे बैठकर बात कर रहे हैं। ये चौपाल नहीं, भरोसे की बैठक है बेटा।”
“यह सिर्फ शासन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासन की मिसाल है।”
“तो ये थी मावली की सांगवा पंचायत से ‘रात्रि चौपाल’ की वो तस्वीर, जहां रात के अंधेरे में उम्मीदों का उजाला फैला। कलेक्टर नमित मेहता की यह पहल सिर्फ समस्याएं सुलझाने का माध्यम नहीं, बल्कि एक संदेश है – कि शासन अब गांव के चौपाल में है, कागज़ों में नहीं।”
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