
उदयपुर। झीलों का शहर, महलों की छन, और चारों ओर पहाड़ों की बाहों में लिपटा उदयपुर — जहां करवा चौथ सिर्फ व्रत नहीं, एक फिल्मी एहसास बन जाता है।
झील पिछोला के किनारे चांद निकलते ही जब महल की रोशनी पानी पर झिलमिलाती है, तो लगता है जैसे यशराज की किसी फिल्म का क्लाइमैक्स चल रहा हो।
नवरंग साड़ी में सजी महिलाएं, हाथों में सजी मेहंदी, और छलकते करवे की झलक — पूरा शहर मानो किसी “राज और सिमरन” के सीन में तब्दील हो जाए।

फतहसागर की लहरें, सज्जनगढ़ का आसमान और चांद की पहली किरण — सब मिलकर इस रात को जादुई बना देते हैं।
यहां करवा चौथ मनाना सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक रोमांटिक सीन है, जिसमें हर जोड़ा अपने प्यार की फिल्म का हीरो-हीरोइन बन जाता है।
सच कहें तो, उदयपुर में करवा चौथ – परंपरा से ज़्यादा, एक रोमांचक प्रेमकथा है।










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