
ऑपरेशन का खूनी क्लाइमेक्स
मेक्सिको के इतिहास में पिछले कुछ दिन सबसे भारी रहे। अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने ‘एल मेंचो’ के सैटेलाइट फोन के सिग्नल को इंटरसेप्ट किया, जिसके बाद उसकी सटीक लोकेशन ‘तपालपा’ के दुर्गम पहाड़ी इलाके में ट्रेस हुई। मेक्सिकन स्पेशल फोर्सेज ने आसमान से ब्लैक-हॉक हेलीकॉप्टरों और जमीन से बख्तरबंद गाड़ियों के जरिए चारों तरफ से घेराबंदी की। दोनों ओर से हुई भीषण गोलीबारी में आखिरकार 15 मिलियन डॉलर का इनामी ‘नेमेसियो रूबेन ओसेगुएरा सर्वेंट्स’ मारा गया।
कौन था मौत का सौदागर ‘एल मेंचो’?
एक साधारण पुलिसकर्मी से दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग माफिया बनने का एल मेंचो का सफर खून और बारूद से लिखा गया था। उसने ‘एल चापो’ के सिनलोआ कार्टेल से अलग होकर अपना खुद का संगठन ‘CJNG’ बनाया। उसने अपने लड़ाकों को सेना की तरह ट्रेनिंग दी और रॉकेट लॉन्चर व एंटी-एयरक्राफ्ट गन जैसे घातक हथियारों से लैस किया। अमेरिका में होने वाली ‘फेंटेनल’ (Fentanyl) की तस्करी के पीछे उसी का दिमाग था।
शव गिरते ही भड़की प्रतिशोध की आग
जैसे ही एल मेंचो की मौत की पुष्टि हुई, उसके वफादार ‘हिटमैन’ सड़कों पर उतर आए। ग्वाडलहारा और प्यूर्टो वालार्टा जैसे पर्यटन केंद्रों में उपद्रवियों ने बसों और ट्रकों को बीच सड़क पर खड़ा कर आग के हवाले कर दिया, जिसे स्थानीय भाषा में ‘नार्को-ब्लॉक’ कहा जाता है। शहर के प्रवेश द्वारों को सील कर दिया गया और सुरक्षा बलों पर रॉकेट से हमले किए गए।
बदल जाएगा अपराध का भूगोल
एल मेंचो का खात्मा अंतरराष्ट्रीय ड्रग वॉर में एक बड़ा मोड़ है। अब विशेषज्ञों को डर है कि उसके साम्राज्य पर कब्जे के लिए मेक्सिको में एक नया ‘गैंगवार’ शुरू हो सकता है। एक तरफ सिनलोआ कार्टेल अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश करेगा, वहीं दूसरी तरफ एल मेंचो के उत्तराधिकारी अपनी साख बचाने के लिए और अधिक हिंसक हो सकते हैं।
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने सेना को युद्ध स्तर पर तैनात रहने के आदेश दिए हैं। मेक्सिको की सड़कों पर पसरा सन्नाटा और जलती गाड़ियां इस बात का सबूत हैं कि एक माफिया का अंत भले ही हो गया हो, लेकिन उसकी छोड़ी हुई दहशत का साया अभी भी बरकरार है।
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