
इस्लामाबाद/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को इस्लामाबाद में होने वाली उच्च स्तरीय शांति वार्ता से पहले एक भावुक और कूटनीतिक संदेश वाली तस्वीर सामने आई है। ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबफ जब इस्लामाबाद के लिए रवाना हुए, तो उनके विमान की सीटें खाली नहीं थीं, बल्कि वहां मिनाब स्कूल हमले के पीड़ितों की यादें मौजूद थीं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि गालिबफ के विमान की सीटों पर मिनाब के एलिमेंट्री स्कूल पर हुए हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें, उनके स्कूल बैग और गुलाब के फूल रखे गए थे।
गालिबफ का संदेश : गालिबफ ने ‘X’ पर लिखा, “मिनाब 168, इस विमान में मेरे साथी।” * पृष्ठभूमि: ज्ञात हो कि 28 फरवरी, 2026 को मिनाब के एक स्कूल पर हुए हमले में 165 बच्चों और स्टाफ की मौत हो गई थी, जिसका आरोप ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर लगाया है। इस भावनात्मक कदम के जरिए ईरान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर वार्ता से पहले अपना पक्ष और पीड़ितों का दर्द साझा किया है।
“अच्छे इरादे, लेकिन भरोसा शून्य”: गालिबफ
इस्लामाबाद पहुंचने पर गालिबफ ने बेहद कड़ा और सावधानी भरा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान वार्ता की मेज पर तो है, लेकिन उसे अमेरिका पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है।
अनुभव की कड़वाहट : उन्होंने कहा, “अमेरिकियों के साथ बातचीत का हमारा अनुभव हमेशा समझौतों के उल्लंघन और नाकामी वाला रहा है।”
ईरान की शर्त : गालिबफ ने जोर दिया कि समझौता तभी संभव है जब अमेरिका ईरानी लोगों के अधिकार देने और असली इरादे के साथ बात करने को तैयार हो। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बातचीत का इस्तेमाल केवल दिखावे के लिए किया गया, तो ईरान इसका कड़ा जवाब देगा।
अमेरिका का रुख: “खुले हाथ और सख्त चेतावनी”
दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं।
वेंस का बयान : उन्होंने कहा, “अगर ईरानी अच्छी नीयत से बात करेंगे, तो हम हाथ बढ़ाने को तैयार हैं। लेकिन अगर उन्होंने हमारे साथ ‘खेलने’ की कोशिश की, तो वे पाएंगे कि हमारी टीम इसके लिए तैयार नहीं है।”
डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी : राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर संकेत दिया कि ईरान अपनी ताकत का बढ़ा-चढ़ाकर आकलन कर रहा है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव को भी बड़े भू-राजनीतिक संदर्भ में देखने की बात कही।
इस्लामाबाद की यह वार्ता केवल दो देशों के बीच की बातचीत नहीं है, बल्कि एक तरफ ‘मिनाब हमले’ का जख्म है और दूसरी तरफ ‘होर्मुज’ का तनाव। पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जेडी वेंस और गालिबफ विश्वास की इस भारी कमी को पाट पाएंगे।
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