काली परछाई : वेश बदला, कर्म नहीं, नाबालिग से दुष्कर्मी महिलाओं के कपड़ों में दबोचा, जुलूस निकाला

उदयपुर। 27 नवंबर की रात उदयपुर शहर की शांत फिजाओं में सवीना थाने की हवा उस रात भारी थी। एक महिला के आंसुओं और कांपती आवाज़ ने एक ऐसे जघन्य अपराध की दास्तान खोली, जिसने पुलिस के आला अधिकारियों तक को चौंका दिया।

पीड़िता, जो अपने पति से अलग होने के बाद चंद्र शेखर पारिख नामक व्यक्ति के साथ ‘लिव-इन’ संबंध में रह रही थी, उसने अपनी रिपोर्ट दर्ज कराई। खारिया मीठापुरा, बिलाड़ा, जोधपुर का निवासी चंद्र शेखर, महिला, उसके बच्चों और अपनी मां के साथ एक ही छत के नीचे रह रहा था। वह भरोसा जो महिला ने चंद्र शेखर पर किया था, पिछले एक महीने से एक काले, भयावह रहस्य में बदल चुका था।

रिपोर्ट में बताया गया कि चंद्र शेखर, महिला की नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म और अप्राकृतिक शारीरिक संभोग जैसा घिनौना कृत्य कर रहा था। यह सब वह नाबालिग को डरा-धमका कर कर रहा था। भारतीय न्याय संहिता 2023 और पोक्सो एक्ट की संगीन धाराओं के तहत तत्काल एक मामला दर्ज किया गया।

एसपी योगेश गोयल ने मामले की गंभीरता को समझा और तुरंत महिला अपराध अनुसंधान प्रकोष्ठ की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक माधुरी वर्मा को अनुसंधान का जिम्मा सौंपा।

पूरे शहर में सनसनी फैल चुकी थी। एसपी गोयल ने आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी का निर्देश दिया। एडीशनल एसपी उमेश ओझा और माधुरी वर्मा के सुपरविजन में, सवीना थानाधिकारी अजय सिंह राव के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।

चंद्र शेखर पारिख एक पल में हवा हो गया था। पुलिस टीम ने तकनीकी और आसूचना का जाल बिछाया, हर संभावित ठिकाने पर नज़र रखी। लेकिन भगोड़ा शातिर था।

तभी टीम को एक चौंकाने वाली सूचना मिली—गिरफ्तारी से बचने के लिए, 28 वर्षीय चंद्र शेखर ने अपना हुलिया पूरी तरह बदल लिया था। वह महिलाओं की वेशभूषा और कपड़े पहनकर शहर में घूम रहा था, यह उम्मीद कर रहा था कि कोई भी उसे एक घिनौने अपराधी के रूप में पहचान नहीं पाएगा।

पुलिस टीम ने तुरंत इस नई जानकारी पर काम किया। हेड कांस्टेबल कृष्णप्रताप सिंह, कांस्टेबल छगनलाल, मांगीलाल, विक्रम सिंह, सतपाल सिंह, और शिवलाल ने मिलकर शहर के उन इलाकों को छाना जहाँ ऐसे रूप बदले हुए संदिग्धों के छिपने की संभावना थी।

एक गली के कोने में, सादी वर्दी में तैनात टीम ने उस ‘लेडी’ पर अपनी पैनी नज़रें गड़ाईं, जिसका चलना और हाव-भाव संदिग्ध लग रहा था। पूछताछ की गई, और कुछ ही देर में, ‘नकाब’ उतर गया। महिलाओं के कपड़े पहने, अपना हुलिया बदल कर घूम रहा चंद्र शेखर पारिख आखिरकार पकड़ा गया।

सवीना पुलिस की त्वरित और सफल कार्रवाई ने एक जघन्य अपराधी को सलाखों के पीछे पहुंचाया। इस गिरफ्तारी ने न केवल पीड़िता को न्याय की पहली उम्मीद दी, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि कानून के शिकंजे से बचने के लिए अपनाया गया कोई भी भेष या रूप काम नहीं आएगा।

जघन्य मामले में अग्रिम अनुसंधान जारी है। सवीना पुलिस टीम की इस तत्परता ने साबित कर दिया कि उदयपुर पुलिस बच्चों और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।

 

 

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