ईरान-अमेरिका युद्ध लाइव : अमेरिका ने केश्म और गोरुक पर बरसाए बम, कुवैत में मिसाइल और ड्रोन हमले

 

तेहरान/यूएई।

 

खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने सप्ताहांत में ईरान के गोरुक शहर और केश्म (Qeshm) द्वीप पर स्थित रडार और ड्रोन ठिकानों पर “आत्मरक्षा में हवाई हमले” करने का दावा किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी MQ1 ड्रोन को मार गिराए जाने और जहाजों के लिए पैदा हुए खतरों के जवाब में की गई है।

इस बीच, खाड़ी के अन्य हिस्सों में भी युद्ध की लपटें फैल गई हैं। कुवैत की सेना ने देश में “शत्रुतापूर्ण मिसाइल और ड्रोन हमलों” की पुष्टि की है, जिसके बाद पूरे कुवैत में हवाई रक्षा प्रणालियों (एयर डिफेंस) को सक्रिय कर दिया गया और सायरन बजने लगे। वहीं, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उन्होंने उस हवाई पट्टी (एयरबेस) को निशाना बनाया है, जहां से ईरान के सीरिक द्वीप पर अमेरिकी हमला हुआ था।

 

युद्ध से अमेरिका की रणनीतिक स्थिति कमजोर: विशेषज्ञ

‘सूफान सेंटर’ के कार्यकारी निदेशक कॉलिन क्लार्क ने अल जज़ीरा से बात करते हुए कहा कि ईरान के साथ इस युद्ध के बाद अमेरिका बेहद कमजोर रणनीतिक स्थिति में आ गया है। क्लार्क ने कहा:

“बाइडेन-ट्रम्प प्रशासन को शायद इस बात का अंदाजा नहीं है कि अमेरिका के लिए परिस्थितियां कितनी बिगड़ चुकी हैं। हमने ईरान के सर्वोच्च नेता की जगह आईआरजीसी के कहीं अधिक कट्टरपंथी और युवा धड़े को मजबूत कर दिया है। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ व्यावहारिक रूप से बंद है और अमेरिका का मिसाइल स्टॉक खत्म होने की कगार पर है, जिससे दुनिया के अन्य हिस्सों में हमारी सैन्य क्षमता सीमित हो जाएगी। यह विदेश नीति की एक बड़ी नाकामी है।”

इसके साथ ही, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते के लिए और अधिक सख्त शर्तें जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज पर एक इंटरव्यू में चेतावनी दी कि यदि ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका सैन्य रूप से इस मामले को खत्म कर सकता है।

 

लेबनान में इजरायल का बड़ा जमीनी हमला, दुनिया भर में निंदा

दूसरी ओर, इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में एक बफर जोन बनाने के लिए अपने जमीनी अभियान (ग्राउंड ऑपरेशन) का भारी विस्तार किया है। लेबनानी सैन्य विशेषज्ञ ब्रिगेडियर जनरल हसन जौनी के अनुसार, इजरायली सेना ने कई मोर्चों पर बढ़त बनाते हुए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘ब्यूफोर्ट कैसल’ पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है और वहां अपना झंडा फहरा दिया है। रविवार को लेबनान पर हुए 36 से अधिक इजरायली हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और 35 अन्य घायल हो गए, जिनमें कई मेडिकल स्टाफ और बच्चे शामिल हैं।

इजरायल के इस बढ़ते आक्रमण की वैश्विक स्तर पर तीखी आलोचना हो रही है:

फ्रांस: राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि लेबनान में इस बड़े सैन्य विस्तार का कोई औचित्य नहीं है। फ्रांस ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपातकालीन बैठक बुलाने की मांग की है।

ब्रिटेन: विदेश मंत्री यवेट कूपर ने इजरायल से अपनी सैन्य गतिविधियां तुरंत रोकने का आग्रह किया है।

कतर और मिस्र: दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की निंदा करते हुए इजरायल से लेबनानी क्षेत्र से तुरंत पीछे हटने को कहा है।

इस बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के कारण आज सुबह एशियाई शेयर बाजारों के खुलते ही कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 2 फीसदी से अधिक का उछाल आया है, जिससे ब्रेंट क्रूड वायदा बढ़कर 93 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

 

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