मिड डे मिल के नाम पर 2000 करोड़ की खुली लूट : कोविड में बच्चों के हिस्से का राशन डकारा, अफसर–निजी फर्मों की साजिश बेनकाब


21 नामजद, एसीबी ने दर्ज किया केस—राज्य को भारी आर्थिक चोट

जयपुर। कोविड-19 महामारी के दौरान जब स्कूल बंद थे और गरीब बच्चों के पोषण की जिम्मेदारी सरकार पर थी, उसी दौर में राज्य मिड डे मिल योजना को भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बना दिया गया। योजना के तहत खाद्यान्न आपूर्ति के नाम पर करीब 2000 करोड़ रुपये की सुनियोजित लूट सामने आई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने कॉनफैड के अधिकारियों और निजी फर्मों की मिलीभगत को उजागर करते हुए 21 नामजद आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया है।

जांच में सामने आया है कि दाल, तेल, मसाले आदि के कॉम्बो पैक को एफएसएसएआई और एगमार्क मानकों के अनुरूप बताकर डोर-स्टेप डिलीवरी का दावा किया गया, जबकि हकीकत में न तो गुणवत्ता थी और न ही वास्तविक आपूर्ति। कागजों पर माल दौड़ा, जमीन पर कुछ और ही खेल चला।

एसीबी की जांच में खुलासा हुआ कि मिड डे मिल से जुड़े अफसरों और कॉनफैड अधिकारियों ने आपसी सांठगांठ कर नियमों में मनमाने बदलाव किए। पात्र और योग्य फर्मों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर धकेला गया और चहेती फर्मों को फायदा पहुंचाया गया। इसके बाद टेंडरधारी फर्मों ने अवैध रूप से सबलैट कर दिया और फर्जी सप्लायर-ट्रांसपोर्टर का पूरा नेटवर्क खड़ा कर दिया गया।

सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि कई मामलों में बिना किसी वास्तविक खरीद और आपूर्ति के ही फर्जी, महंगे बिल बनाए गए और उन्हीं के आधार पर सरकारी भुगतान उठा लिया गया। इस तरह योजनाबद्ध धोखाधड़ी और कूटरचना के जरिए राज्य राजकोष को लगभग 2000 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान पहुंचाया गया।

प्रकरण में संलिप्त पाए जाने पर सांवतराम (सहायक लेखाधिकारी), राजेन्द्र, लोकेश कुमार बापना, प्रतिभा सैनी, योगेन्द्र शर्मा, राजेन्द्र सिंह शेखावत, रामधन बैरवा, दिनेश कुमार शर्मा, कंवलजीत सिंह राणावत, मधुर यादव, त्रिभुवन यादव, सतीश मुलचंद व्यास, दीपक व्यास, रितेश यादव, शैलेश सक्सैना, बी.सी. जोशी, चंदन सिंह सहित तिरूपति सप्लायर्स, जागृत एंटरप्राइजेज, एमटी एंटरप्राइजेज और साई ट्रेडिंग के खिलाफ एसीबी में मामला दर्ज किया गया है।

एसीबी अब वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों की कूटरचना और सरकारी धन की बंदरबांट की परत-दर-परत जांच कर रही है। यह घोटाला सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि बच्चों के हक पर डाका है।

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