तेहरान/रियाद — ईरान और मध्य पूर्व में स्थिति और भी अनियंत्रित हो गई है। जहाँ एक ओर युद्ध अब तेहरान के रिहायशी इलाकों के भीतर पहुँच गया है, वहीं दूसरी ओर सर्वोच्च नेता की मौत के बाद ईरान ने अपने नए प्रशासनिक ढांचे की घोषणा कर दी है। इस बीच, खाड़ी देशों (GCC) पर हुए ईरानी हमलों ने पूरे क्षेत्र में ‘रेड अलर्ट’ घोषित कर दिया है।
1. तेहरान के हृदय स्थल पर प्रहार: 7 ठिकानों पर बमबारी
आज का दिन तेहरान के नागरिकों के लिए सबसे खौफनाक रहा। अब तक हमले बाहरी इलाकों तक सीमित थे, लेकिन आज इजराइली और अमेरिकी विमानों ने शहर के बीचों-बीच 7 प्रमुख स्थानों को निशाना बनाया।
दहशत: धमाके तेहरान एयरपोर्ट, प्रमुख होटलों और शॉपिंग मॉल्स के पास हुए हैं।
मानवीय संकट: पहली बार युद्ध लोगों के घरों के इतना करीब पहुँचा है। शहर में भोजन और राशन की भारी किल्लत शुरू हो गई है, और लोग जान बचाने के लिए शेल्टरों की तलाश में भटक रहे हैं।
2. ईरान का नया नेतृत्व: ‘तीन सदस्यीय परिषद’ का गठन
अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद सत्ता के शून्य को भरने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया के तहत एक अस्थायी नेतृत्व परिषद (Temporary Leadership Council) बनाई गई है।
मुख्य सदस्य: इस परिषद में कट्टरपंथी धर्मगुरु अयातुल्ला अलीरेज़ा अराफी, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और न्यायपालिका प्रमुख मोहसेनी-एजेई शामिल हैं।
सैन्य कमान: अहमद वाहिदी को IRGC का नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया गया है, जबकि अली लारिजानी पर्दे के पीछे से मुख्य रणनीतिकार की भूमिका निभा रहे हैं।
3. खाड़ी देशों (GCC) में इमरजेंसी: कतर और UAE पर मिसाइल हमले
ईरान द्वारा अपने पड़ोसियों पर किए गए ‘प्रतिशोध’ के हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का नया मोर्चा खुल गया है।
मिसाइल प्रहार: कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपनी धरती पर ईरानी मिसाइल गिरने की पुष्टि की है। UAE में इमरजेंसी मोबाइल अलर्ट जारी कर लोगों को तुरंत शेल्टरों में जाने को कहा गया है।
आपात बैठक: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के छह देशों के विदेश मंत्रियों ने आज एक आपातकालीन वीडियो कॉन्फ्रेंस बुलाई है। बहरीन ने इन हमलों को “पड़ोसी धर्म का उल्लंघन” बताते हुए संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है।
4. भारत की बढ़ती चिंता
खाड़ी देशों में छिड़े इस युद्ध ने भारत सरकार की नींद उड़ा दी है। वहाँ रह रहे 1 करोड़ से अधिक भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि हो गई है। विदेश मंत्रालय स्थिति पर पल-पल की नज़र रख रहा है और किसी भी बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन (निकासी) की संभावनाओं को टटोल रहा है।
निष्कर्ष: ईरान इस समय एक साथ तीन मोर्चों पर लड़ रहा है—भीषण बमबारी, आंतरिक सत्ता परिवर्तन और अपने पड़ोसियों के साथ बढ़ता तनाव। अगले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि यह युद्ध पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था और स्थिरता को किस हद तक प्रभावित करेगा।
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