
हनुमानगढ़ | हनुमानगढ़ के लिए मंगलवार की वह सुबह खुशियां लेकर नहीं, बल्कि मातम की चादर ओढ़कर आई। जब परिंदे चहचहा रहे थे और लोग अपने सपनों और जिम्मेदारियों की पोटली बांधकर अपनों से विदा लेकर बस में सवार हुए थे, उन्हें क्या पता था कि बरमसर का वह मोड़ उनकी जिंदगी का आखिरी मोड़ साबित होगा।
सुबह के करीब 7 बजे थे। रावतसर मेगा हाईवे पर रफ्तार का ऐसा कहर बरपा कि बस और ट्रक की भिड़ंत ने पल भर में हंसते-खेलते चेहरों को लहूलुहान कर दिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि लोहे की चादरें कागज की तरह खिंच गईं और बस के परखच्चे उड़ गए। जो बस चंद मिनट पहले मुसाफिरों की बातों से गूंज रही थी, वहां अब सिर्फ दर्दनाक चीखें और सन्नाटा पसरा था।
हादसे के बाद का मंजर रूह कंपा देने वाला था। सड़क पर बिखरा कांच, सामान और अपनों को बचाने की जद्दोजहद करती कांपती आवाजें हर किसी की आंखें नम कर रही थीं। 5 बदनसीब जिंदगियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, उनके सपने उसी मलबे के नीचे दबकर रह गए।
पुलिस और प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए गंभीर घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां अब भी 5 लोग जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। अस्पताल के गलियारों में सन्नाटा है, लेकिन वहां मौजूद परिजनों की आंखों में बेबसी और अपनों की सलामती की मूक प्रार्थनाएं साफ देखी जा सकती हैं। एसडीएम संजय कुमार और अन्य अधिकारियों ने घायलों को सांत्वना दी, लेकिन उस दर्द की भरपाई शायद ही कोई शब्द कर सके।
आज हनुमानगढ़ की फिजाओं में गम है। यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए एक कभी न खत्म होने वाला अंधेरा है, जिन्होंने आज अपने सबसे प्रिय सदस्यों को हमेशा के लिए खो दिया।
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