
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में रविवार की वो सुबह खुशियों के बजाय चीख-पुकार और मातम की चादर ओढ़कर आई। शाहदरा के विवेक विहार में एक चार मंजिला इमारत उस वक्त श्मशान में तब्दील हो गई, जब एक एयर कंडीशनर (AC) में हुए धमाके ने हंसते-खेलते परिवारों को मौत की नींद सुला दिया। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे ने प्रशासन और सुरक्षा मानकों पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
सुबह करीब 3:13 बजे, जब लोग मीठी नींद सो रहे थे, तभी एक जोरदार धमाके ने पूरी बिल्डिंग को हिलाकर रख दिया। देखते ही देखते आग की लपटें दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल के फ्लैट्स को अपनी गिरफ्त में ले चुकी थीं। मंजर इतना खौफनाक था कि लोगों को भागने तक का मौका नहीं मिला। धुएं के काले गुबार और आग की तपिश के बीच मासूम जिंदगियां खिड़कियों और बालकनियों पर खड़े होकर जिंदगी की भीख मांगती रहीं।
हादसे में 9 लोगों की जान चली गई। स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है; उनका कहना है कि धमाका 3:13 बजे हुआ लेकिन फायर ब्रिगेड को पहुँचने में वक्त लगा। अगर मदद चंद मिनट पहले आती, तो शायद कुछ और जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। हालांकि, दमकल कर्मियों ने अपनी जान पर खेलकर 15 लोगों को खिड़कियों से बाहर निकाला, लेकिन 9 बदकिस्मत लोगों के लिए यह रविवार उनकी जिंदगी का आखिरी दिन साबित हुआ।
बिल्डिंग का पिछला हिस्सा राख हो चुका है और सामने की दीवारें धुएं से काली पड़ गई हैं, जो इस त्रासदी की गवाही दे रही हैं। डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा के मुताबिक सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है क्योंकि डर है कि मलबे और राख के नीचे अभी भी कुछ लोग दबे हो सकते हैं। एक मामूली मशीन (AC) का फटना 9 घरों के चिराग बुझा देगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। अब सवाल यह है कि इस जानलेवा लापरवाही का जिम्मेदार कौन है?
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