युद्ध के मैदान में क्या हाल हैं यहां पढ़िए…वैश्विक शांति की आस या युद्ध का नया तूफान?

वाशिंगटन/बेरूत। मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) की धरती पर छिड़ी जंग के बीच आज एक ऐसी खबर आई जिसने दुनिया को एक पल के लिए राहत दी, लेकिन अगले ही पल फिर से अनिश्चितता के गहरे साए में धकेल दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बेरूत से अपनी सेना पीछे हटाने को कहा है। इतना ही नहीं, ट्रंप के मुताबिक उनकी हिजबुल्लाह के प्रतिनिधियों से भी बात हुई है, जो इजरायली सेना पर गोलाबारी रोकने के लिए “राजी हो गए हैं।”

लेकिन, युद्ध की क्रूर हकीकत इतनी आसान नहीं होती। ट्रंप के इस दावे के तुरंत बाद इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से आया बयान इस तथाकथित शांति पर सवालिया निशान लगाता है। नेतन्याहू ने दो-टूक शब्दों में ट्रंप से कहा है कि अगर हिजबुल्लाह ने इजरायली शहरों और नागरिकों पर रॉकेट दागना बंद नहीं किया, तो लेबनान की राजधानी बेरूत पर इजरायली हमले जारी रहेंगे और दक्षिणी लेबनान में सैन्य अभियान योजना के मुताबिक ही चलेगा।

अस्पतालों पर गिरते बम और उजड़ते आशियाने : लेबनान में चीखें और तबाही

नेताओं के दावों और कूटनीति के बंद कमरों से दूर, लेबनान की जमीनी हकीकत आज भी खून और आंसुओं से लिखी जा रही है। दक्षिणी लेबनान के टायर (Tyre) शहर में इजरायल के ताजा हवाई हमलों ने भारी तबाही मचाई है। एक हमला सीधे जबाल आमेल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के सामने हुआ, जिसमें दो बेकसूर लोगों की मौत हो गई और अस्पताल की खिड़कियां-दीवारें मलबे में तब्दील हो गईं। अपनी जान बचाने के लिए बदहवास भागते डॉक्टरों और मरीजों की तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं। अल-मंसूरी और अल-होश में रातों-रात ढहाए गए मकानों के मलबे से चीखते-चिल्लाते हुए घायलों को निकाला जा रहा है। लाखों लोग अपने घरों को छोड़कर उत्तर की ओर भागने को मजबूर हैं, हाईवे पर सिर्फ गाड़ियों का लंबा जाम और बेघर हुए इंसानों का दर्द दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सांसद इल्हाम ओमर ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि “इजरायल अब गाजा की विनाशकारी रणनीति को लेबनान में दोहरा रहा है।”

ईरान की खुली सैन्य चेतावनी: ‘यह कोई खोखली धमकी नहीं है’

इस बीच, सुरसा के मुंह की तरह फैल रहे इस युद्ध में ईरान ने अमेरिका और इजरायल को सीधे शब्दों में अंजाम भुगतने की चेतावनी दे दी है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया पर सख्त लहजा अपनाते हुए कहा, “यदि लेबनान पर हमले पूरी तरह नहीं रुके, तो इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सेना के लिए इसके परिणाम बेहद गंभीर होंगे। वे अच्छी तरह जानते हैं कि यह कोई खोखली धमकी नहीं है, हम सैन्य जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

घर के भीतर घिरे नेतन्याहू: इजरायल की सड़कों पर अपनों के बीच ही छिड़ी जंग

बाहरी मोर्चे पर युद्ध लड़ रहे इजरायल के भीतर भी इस समय गृहयुद्ध जैसे हालात बन गए हैं। सेना में जबरन भर्ती के कानून के खिलाफ इजरायल के यरूशलेम और तेल अवीव की सड़कों पर हजारों की संख्या में ‘अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स’ (रूढ़िवादी) यहूदी उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों और ट्रेनों को पूरी तरह ठप कर दिया। वे नारे लगा रहे थे- “हम एक यहूदी के रूप में मरना पसंद करेंगे, लेकिन ज़ायोनी सैनिक बनकर नहीं जिएंगे।” इस प्रदर्शन को कुचलने के लिए इजरायली पुलिस ने पानी की बौछारें कीं और घोड़ों पर सवार पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा। कई मोर्चों पर एक साथ युद्ध लड़ रही इजरायली सेना इस समय सैनिकों की भारी कमी (स्टाफिंग क्राइसिस) से जूझ रही है, जिसके कारण यह अंदरूनी असंतोष अब उबलने लगा है।

अमरीका में भी राजनीतिक घमासान: ट्रंप की नीतियों पर सवाल

दूसरी तरफ, अमेरिका के भीतर भी विपक्ष ने ट्रंप की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अमेरिकी सीनेट के अल्पसंख्यक नेता चक शूमर ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि ट्रंप कह रहे हैं कि उन्हें युद्ध खत्म करने की “कोई जल्दी नहीं है।” शूमर ने तीखे शब्दों में पूछा कि क्या ट्रंप को उन अमेरिकी सैनिकों और उनके परिवारों का कोई दर्द नहीं दिख रहा जो खतरे में हैं? इस युद्ध की वजह से अमेरिकी जनता रिकॉर्ड तोड़ तेल की कीमतों की मार झेल रही है। कुल मिलाकर, मध्य पूर्व का यह चक्रव्यूह सुलझने के बजाय और उलझता जा रहा है, जहां शांति की हर कोशिश बारूद के ढेर पर टिकी नजर आ रही है।

 

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