दिल्ली में रेड पड़ी तो थाने से 1 KM दूर खोह नागोरियान में बनाई थी ‘डेथ फैक्ट्री’
जयपुर। राजधानी जयपुर के खोह नागोरियान थाना क्षेत्र के करीम नगर-बी में मंगलवार सुबह 11 बजे हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। रिहायशी इलाके के एक तंग मकान में बारूद का अवैध कारोबार कर एक बच्चे और दो सगे भाइयों समेत कुल 8 बेगुनाह लोगों की जान लेने वाले मुख्य आरोपी फिरोज की तलाश में जयपुर पुलिस ने अब चौतरफा जाल बिछा दिया है। इस सिलसिले में पुलिस की एक विशेष टीम दिल्ली के लिए रवाना की जा चुकी है, जबकि मकान मालिक याकूब और उसका भाई कय्यूम भी हादसे के बाद से ही मोबाइल बंद कर फरार हैं।
जांच में जो चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, वे यह बताने के लिए काफी हैं कि यह हादसा कोई अचानक हुई त्रासदी नहीं, बल्कि कानून की धज्जियां उड़ाकर जानबूझकर बुलाई गई मौत थी।
हादसे से जुड़े मुख्य विवरण और रूह कंपा देने वाला मंजर
यह अवैध फैक्ट्री करीम नगर-बी (मकान नंबर-88) के मात्र 55.5 वर्ग गज (20×25 फीट) के एक छोटे से मकान में पिछले दो साल से चल रही थी। हादसा इतना वीभत्स था कि तीन लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि अन्य लोग जलती हुई हालत में चीखते-चिल्लाते हुए जान बचाने के लिए बाहर सड़क की तरफ भागे और तड़पते रहे।
इन मासूमों और युवाओं ने गंवाई जान: मोहम्मद अशरफ (40), अब्दुल वहीद (46), नासिर खान (25), समीर खान (20), मोहम्मद रब्बिल (16), बिलाल खान (28) और आजीम खान (18) — (दोनों सगे भाई)। नोट: एक अन्य मृतक की शिनाख्त होना अभी बाकी है।
एक भाई का छूटा काम, तो दूसरे के साथ आ गई मौत: मृतकों में शामिल बिलाल खान पहले सिलाई का काम करता था। हाल ही में उसका काम छूट जाने के कारण वह मंगलवार को अपने छोटे भाई आजीम खान से मिलने उसकी फैक्ट्री चला गया था, जहाँ आजीम मजदूरी करता था। दोनों भाई बैठकर बातचीत ही कर रहे थे कि अचानक हुए विस्फोट ने दोनों को हमेशा के लिए जुदा कर दिया।
दिल्ली पुलिस की कड़ाई से बचकर जयपुर को बनाया था ठिकाना
पुलिस अनुसंधान में सामने आया है कि आरोपी फिरोज और उसका साथी वसीम (निवासी दिल्ली-फिरोजाबाद) शादियों और इवेंट्स में इस्तेमाल होने वाले आतिशबाज़ी के सामान (चाइनीज पायरो) के बड़े सिंडिकेट से जुड़े हैं।
दिल्ली में हुई थी रेड: पूर्व में दिल्ली में इनकी एक अवैध निर्माण इकाई पर पुलिस की ओर से सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और रेड (छापामारी) की गई थी। दिल्ली में कानून का फंदा कसने लगा, तो आरोपियों ने अपनी अवैध गतिविधियों को जारी रखने के लिए जयपुर के खोह नागोरियान इलाके को नया सेफ हाउस चुन लिया।
6 साल पहले लिया था मकान: आरोपियों ने घाटगेट निवासी याकूब और कय्यूम नामक दो भाइयों से यह मकान करीब 6 साल पहले किराए पर लिया था।
4 अवैध फैक्ट्रियों का नेटवर्क: शुरुआती जांच में दावा किया जा रहा है कि फिरोज इस पूरे इलाके में ऐसी 3 से 4 अवैध फैक्ट्रियां संचालित कर रहा है। वह दिल्ली से कच्चा बारूद और अनपैक माल लाता था और जयपुर की इन तंग गलियों में स्थानीय गरीब मजदूरों से उसकी पैकेजिंग और मैन्युफैक्चरिंग करवाता था।
कैसे भड़की चिंगारी? FSL जांच में जुटे दो बड़े अंदेशे
शुरुआती जांच में सामने आया है कि हादसे के वक्त फैक्ट्री के भीतर लगभग 11 मशीनें चल रही थीं, जिनसे गत्तों के खोल में 25-25 किलोग्राम बारूद भरा जा रहा था। हादसे के समय वहां 50 किलो से अधिक बारूद मौजूद था। विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीम आग के सटीक कारणों को लेकर सबूत जुटा रही है, लेकिन प्राथमिक तौर पर दो बड़े अंदेशे जताए जा रहे हैं:
स्मोकिंग (धूम्रपान): संभावना जताई जा रही है कि बारूद के इस गोदाम में काम करने वाले किसी कर्मचारी द्वारा बीड़ी या सिगरेट पीने के बाद फेंकी गई चिंगारी से बारूद ने पलक झपकते ही आग पकड़ ली।
खाना पकाना: यह भी कयास लगाया जा रहा है कि इसी छोटे से कमरे में बारूद के ढेर के ठीक पास मजदूर कुछ खाना पका रहे थे, जिसकी आंच या चिंगारी उड़कर पटाखों के ढेर पर जा गिरी।
नोट: मौके पर पहुंचे स्थानीय निवासी हाशिम अंसारी ने अपनी जान पर खेलकर कमरे से एक घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर को बाहर निकाला, वरना एक और बड़ा धमाका हो सकता था। लोगों को बचाने में हाशिम का पैर और कपड़े भी जल गए।
सवालों के घेरे में खाकी: पुलिस की लाचारी और स्थानीय लोगों का असहयोग
इस भीषण हादसे ने जयपुर पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
थाने से महज 1 किमी की दूरी: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह मौत का खेल खोह नागोरियान थाने से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर चल रहा था। पुलिस का स्थानीय बीट सिस्टम और खुफिया नेटवर्क पूरी तरह फेल साबित हुआ।
100 से ज्यादा घरों में अवैध फैक्ट्रियां: सूत्रों के अनुसार, खोह नागोरियान की तंग गलियों में करीब 100 से ज्यादा घरों में बिना किसी परमिशन के अवैध पटाखा फैक्ट्रियां चल रही हैं। इस धमाके के बाद अन्य सभी अवैध फैक्ट्रियों के संचालक ताले लगाकर फरार हो गए हैं।
स्थानीय लोग नहीं कर रहे सहयोग: पुलिस को इस मामले में एक अजीब चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। खोह नागोरियान पुलिस का कहना है कि तंग गलियों और अवैध कॉलोनियों से घिरे इस इलाके में स्थानीय लोग जांच और आरोपियों की पहचान को लेकर पुलिस का बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रहे हैं।
इसके अलावा, मकान मालिक भाइयों की भी एक नई लापरवाही सामने आई है। जिस मकान में फैक्ट्री चल रही थी, उसमें अलग से कोई कमर्शियल बिजली कनेक्शन नहीं था। दोनों भाइयों ने अपने ही दूसरे मकान से इस अवैध कारखाने में बिजली की केबल दौड़ा रखी थी (अवैध बिजली शेयरिंग)।
प्रशासनिक व राजनीतिक प्रतिक्रिया
दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा — पुलिस कमिश्नर जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद बताया कि प्राथमिक तौर पर यह पटाखों का एक अवैध गोदाम था। रिहायशी इलाके में इस तरह अवैध रूप से विस्फोटक भंडारण करने के मामले की पूरी जांच कर दोषियों और मकान मालिक के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या पुलिस सो रही थी? — विधायक अमीन कागजी स्थानीय विधायक अमीन कागजी ने पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए तीखे सवाल दागे। उन्होंने कहा कि थाने के इतने पास रिहायशी इलाके में पटाखा फैक्ट्री होने की जानकारी क्या पुलिस को वाकई नहीं थी? यह सीधे तौर पर प्रशासनिक फेल्योर है।
प्रशासनिक एक्शन: हादसे की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस पूरी कॉलोनी के वैध/अवैध होने को लेकर संबंधित तहसीलदार और पटवारी से तत्काल विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
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